लखनऊ। सोमवार को शुरुआती कारोबार में भारतीय रुपया लगातार दबाव में रहा। 41 पैसे टूटकर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 93.94 के अपने नए ऑल-टाइम लो पर पहुंच गया है। पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के चलते कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और मजबूत डॉलर ने रुपये को कमजोर कर दिया है।
इसी बीच यूपी कांग्रेस पार्टी ने सोमवार को अपने अधिकारिक एक्स पर लिखा कि 94.05 पार हुआ रुपया, अब कहाँ है वो 56 इंच का सीना? कांग्रेस पार्टी ने लिखा कि डॉलर के मुकाबले रुपये की ऐतिहासिक गिरावट भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक खतरे की घंटी है। आज $1 की कीमत ₹94.05 तक पहुँच गई है, जो सीधे तौर पर आम जनता की जेब पर प्रहार है। जब रुपया कमजोर होता है, तो आयात महंगा होता है और महंगाई बेलगाम हो जाती है।
कांग्रेस ने कहा कि ‘अच्छे दिन’ का वादा करने वाली सरकार के कार्यकाल में आज जनता आर्थिक संकट और बेबसी के दौर से गुजर रही है। यह महज एक आंकड़ा नहीं, बल्कि गिरती अर्थव्यवस्था और आम आदमी की टूटती कमर की जीती-जागती तस्वीर है।
क्यों टूट रहा है रुपया? (मुख्य कारण)
फॉरेक्स ट्रेडर्स के मुताबिक, वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में उछाल ने रुपये पर अतिरिक्त दबाव बनाया है। भारत खाड़ी देशों से आयात होने वाले तेल पर अब प्रति बैरल करीब 50 डॉलर अधिक चुका रहा है, जिससे आयात बिल बढ़ा है और डॉलर की मांग तेज हुई है।
फिनरेक्स ट्रेजरी एडवाइजर्स एलएलपी के ट्रेजरी हेड और एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर अनिल कुमार भंसाली के अनुसार, बाजार में डॉलर की भारी मांग के चलते रुपया तेजी से गिरा है। उन्होंने कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) अलग-अलग स्तरों पर मौजूद रहा, लेकिन उसने रुपये को गिरने दिया क्योंकि डॉलर की डिमांड काफी ज्यादा थी।
एफपीआई आउटफ्लो और शेयर बाजार की कमजोरी
घरेलू शेयर बाजारों में गिरावट और विदेशी निवेशकों (FPI) की लगातार बिकवाली ने भी रुपये को कमजोर किया है। जोखिम से बचने की प्रवृत्ति के चलते निवेशक भारतीय बाजारों से पैसा निकालकर सुरक्षित विकल्पों की ओर जा रहे हैं।
RBI के हस्तक्षेप की उम्मीद
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर रुपये में गिरावट जारी रहती है, तो RBI हस्तक्षेप कर सकता है। हालांकि, तेल कंपनियों और विदेशी निवेशकों की डॉलर मांग निकट भविष्य में ऊंची बनी रह सकती है, जिससे रुपये पर दबाव जारी रहने की आशंका है। इस बीच, डॉलर इंडेक्स भी 0.02% बढ़कर 99.66 पर बना हुआ है, जो वैश्विक स्तर पर डॉलर की मजबूती को दर्शाता है।
वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड वायदा कारोबार में 0.60 प्रतिशत गिरकर 112.90 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। एक्सचेंज के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों ने शुक्रवार को शुद्ध आधार पर 5,518.39 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। इस बीच, आरबीआई ने शुक्रवार को बताया कि 13 मार्च को समाप्त हुए सप्ताह के दौरान भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 7.052 अरब अमेरिकी डॉलर घटकर 709.759 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया।

