LPG संकट: क्या घटने जा रहा है घरेलू गैस सिलेंडर का वजन? 14.2 किलो की जगह मिल सकती है सिर्फ 10 किलो गैस…सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

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नई दिल्ली: पश्चिम एशिया (West Asia) में जारी संघर्ष की तपिश अब भारतीय रसोई तक पहुँचने लगी है। खाड़ी देशों से होने वाले आयात में आई भारी गिरावट के कारण देश में एलपीजी (LPG) का स्टॉक तेजी से कम हो रहा है। इस संकट से निपटने के लिए पेट्रोलियम और गैस कंपनियां एक अभूतपूर्व रणनीति पर विचार कर रही हैं। खबर है कि आने वाले दिनों में घरेलू एलपीजी सिलेंडर में गैस की मात्रा घटाई जा सकती है, ताकि कम स्टॉक में भी अधिक से अधिक परिवारों तक ईंधन पहुँचाया जा सके।

​14.2 किलो के बजाय मिल सकती है 10 किलो गैस

​सरकार के विचाराधीन प्रस्ताव के अनुसार, वर्तमान में मिलने वाले 14.2 किलो के मानक सिलेंडर में गैस की मात्रा घटाकर करीब 10 किलो की जा सकती है। इस कदम के पीछे मुख्य उद्देश्य यह है कि सप्लाई चेन टूटने न पाए और सीमित स्टॉक का वितरण समान रूप से ज्यादा घरों में हो सके। पेट्रोलियम मंत्रालय की जॉइंट सेक्रेटरी सुजाता शर्मा ने भी संकेतों में माना है कि देश में एलपीजी की स्थिति फिलहाल चिंताजनक बनी हुई है।

​आयात में गिरावट और बढ़ता दबाव

​आंकड़ों के अनुसार, खाड़ी देशों से नए शिपमेंट भारत नहीं पहुँच पा रहे हैं। बीते सप्ताह महज दो जहाजों के जरिए लगभग 92,700 टन गैस ही देश में आई है, जो भारत की सिर्फ एक दिन की खपत के बराबर है। वहीं, कमर्शियल सेक्टर में सप्लाई दोबारा शुरू होने से घरेलू कोटे पर दबाव और बढ़ गया है।

​कैसे तय होगी कम वजन वाले सिलेंडर की कीमत?

​अगर सरकार वजन घटाने का फैसला लागू करती है, तो ग्राहकों को राहत देने के लिए इसकी कीमत भी उसी अनुपात में कम रखी जाएगी।

​नया स्टिकर: भ्रम से बचने के लिए कम गैस वाले सिलेंडरों पर विशेष स्टिकर लगाए जाएंगे।

बॉटलिंग प्लांट में बदलाव: इस प्रक्रिया को शुरू करने के लिए बॉटलिंग प्लांट्स के सिस्टम में तकनीकी बदलाव और रेगुलेटरी मंजूरियों की आवश्यकता होगी।

पारदर्शिता: कंपनियों का कहना है कि वे इस बदलाव के बारे में नोटिस और चेतावनी जारी करेंगी ताकि जनता को सही जानकारी मिल सके।

कंपनियों की चिंता और चुनावी असर

गैस कंपनियों ने इस योजना पर अपनी चिंता भी जाहिर की है। उनका मानना है कि अचानक वजन घटाने से उपभोक्ताओं में असंतोष पैदा हो सकता है। विशेष रूप से चुनाव वाले राज्यों में इस मुद्दे पर कड़ा राजनीतिक विरोध देखने को मिल सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अगले महीने तक आयात की स्थिति नहीं सुधरी, तो ऊर्जा संकट और गहरा सकता है। फिलहाल सरकार स्थिति को नियंत्रित करने के लिए हर संभव विकल्प टटोल रही है।