आगरा: भारत की पूर्व प्रधानमंत्री और ‘मिलेनियम लीडर’ स्व. श्रीमती इंदिरा गांधी के विरुद्ध सोशल मीडिया पर की गई बेहद अश्लील और अमर्यादित टिप्पणी का मामला अब एक बार फिर कानूनी मोड़ पर आ गया है। इस प्रकरण में पुलिस द्वारा की जा रही भारी लापरवाही और कोर्ट के आदेशों की अनदेखी को लेकर वादी ने अदालत का दरवाजा खटखटाया है।
मामला 11 मई 2025 का है, जब जितेंद्र तोमर उर्फ ‘जीतू ठाकुर’ नामक व्यक्ति ने सोशल मीडिया पर पूर्व प्रधानमंत्री के चरित्र हनन के उद्देश्य से एक बेहद आपत्तिजनक पोस्ट की थी। इस पोस्ट में उन्होंने एक बेहद घिनौना और अश्लील दावा किया था। घटना के तुरंत बाद, 13 मई 2025 को राजीव गांधी बार एसोसिएशन के अध्यक्ष और वरिष्ठ अधिवक्ता रमाशंकर शर्मा ने थाना न्यू आगरा और पुलिस कमिश्नर के समक्ष शिकायत दर्ज कराई थी।
शुरुआत में पुलिस द्वारा एफआईआर दर्ज न किए जाने पर, अधिवक्ता रमाशंकर शर्मा ने सीजेएम कोर्ट में धारा 174(3) के तहत प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए 26 मई 2025 को पुलिस को रिपोर्ट दर्ज कर विवेचना के सख्त निर्देश दिए थे। कोर्ट के आदेश के बाद 27 मई 2025 को थाना न्यू आगरा ने एफआईआर तो दर्ज कर ली, लेकिन उसके बाद से ही मामले की फाइल ठंडे बस्ते में चली गई।
अधिवक्ता रमाशंकर शर्मा का आरोप है कि एफआईआर दर्ज होने के डेढ़ वर्ष बीत जाने के बाद भी पुलिस ने न तो विवेचना को आगे बढ़ाया, न ही वादी के बयान दर्ज किए और न ही आरोपी के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई की। इस संबंध में वादी ने कई बार उच्च अधिकारियों को पत्र भी लिखे, लेकिन पुलिस की ओर से कोई सुध नहीं ली गई।
अंततः, कोर्ट के आदेश की कथित अवहेलना से नाराज वादी ने आज सीजेएम कोर्ट में शपथ पत्र के साथ एक नया प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया। अदालत ने पुलिस की इस कार्यप्रणाली पर संज्ञान लेते हुए मामले में ‘प्रगति आख्या’ (Progress Report) तलब की है।
मामले की अगली सुनवाई 10 जुलाई 2026 को नियत की गई है। इस प्रकरण ने एक बार फिर सोशल मीडिया पर अमर्यादित टिप्पणियों के खिलाफ कानून की प्रभावशीलता और पुलिस की जवाबदेही पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।


