रामलीला मैदान में राहुल गांधी का बड़ा हमला: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने से लेकर ‘शिव की बारात’ तक, भाषण की 10 बड़ी बातें

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नई दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली स्थित ऐतिहासिक रामलीला मैदान में रविवार को आयोजित ‘INDIA’ गठबंधन की ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ महारैली में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने अपने संबोधन के दौरान केंद्र सरकार और निर्वाचन आयोग पर अत्यंत तीखा हमला बोला। राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को सीधे निशाने पर लेते हुए गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि देश में लंबे समय से सुनियोजित ढंग से वोटों की चोरी की जा रही है और चुनाव आयोग सहित तमाम संवैधानिक संस्थाओं पर सत्ताधारी दल ने कब्जा कर लिया है।

राहुल गांधी ने देश को सही लोकतांत्रिक व्यवस्था पर वापस लाने के लिए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की पुरजोर मांग की और उन्हें जेल भेजे जाने की चेतावनी तक दे डाली। उन्होंने कहा कि विपक्ष की इस लड़ाई का पहला मुख्य कदम मुख्य चुनाव आयुक्त को उनके पद से बेदखल करना है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर भी उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि वे सत्ता से जाना भी चाहें तो विपक्ष उन्हें आसानी से जाने नहीं देगा और उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

​अपने विस्तृत भाषण में राहुल गांधी ने केवल चुनावी गड़बड़ियों का मुद्दा ही नहीं उठाया, बल्कि देश में रोजगार की कमी, किसानों और मजदूरों के अधिकार तथा राष्ट्रीय संपत्तियों के चुनिंदा हाथों में केंद्रीकरण जैसे गंभीर आर्थिक मुद्दों को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि यह किसी एक राजनीतिक दल का विरोध नहीं, बल्कि भारत के करोड़ों युवाओं, मेहनतकशों और आम नागरिकों की बुलंद आवाज है।

अपने तीखे राजनीतिक प्रहारों के बीच राहुल गांधी ने गांधीवादी मूल्यों, मोहब्बत, अहिंसा और सामाजिक समरसता के सिद्धांतों को दोहराते हुए स्पष्ट किया कि विपक्ष किसी से व्यक्तिगत नफरत नहीं करता, लेकिन देश के पवित्र संविधान को नुकसान पहुंचाने की हर कोशिश का मजबूती से मुकाबला किया जाएगा।

राहुल गांधी के भाषण की 10 प्रमुख बातें:

​ज्ञानेश कुमार को पद से हटाना पहला कदम: राहुल गांधी ने स्पष्ट किया कि देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए सबसे प्राथमिक और आवश्यक कदम मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को उनके पद से हटाना है। यह विपक्ष की पूरी लड़ाई का केंद्रीय बिंदु रहेगा।

​’ज्ञानेश कुमार को जाना होगा जेल’: उन्होंने जनता व युवाओं से आह्वान करते हुए कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त को न केवल पद छोड़ना होगा, बल्कि वोटों की कथित चोरी और लोकतंत्र के साथ खिलवाड़ के अपराध में उन्हें जेल की सलाखों के पीछे जाना पड़ेगा।

​प्रधानमंत्री मोदी पर कड़ा बयान: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला बोलते हुए उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री कहीं नहीं जा सकते। वे अगर जाना भी चाहें, तो भी हम उन्हें जाने नहीं देंगे; उनके खिलाफ देश के कानून के तहत कार्रवाई होगी और न्याय सुनिश्चित किया जाएगा।

​वोट की चोरी को बताया ‘देशद्रोह’: राहुल गांधी ने कहा कि नागरिकों के वोट का अधिकार छीनना कोई साधारण अपराध या छोटी-मोटी चोरी नहीं है, बल्कि यह सीधे तौर पर देशद्रोह है। इसके जरिए भारत के आम नागरिक की आवाज को दबाने का प्रयास किया जा रहा है।

​2024 के चुनाव और मतदाता सूची पर सवाल: उन्होंने दावा किया कि 2024 के आम चुनाव में एनडीए और विपक्ष के बीच महज 3 प्रतिशत वोटों का अंतर था। इसके साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव के पश्चात 15 प्रतिशत मतदाताओं के नाम सूची से गायब कर दिए गए और हर सात में से एक वोटर का नाम हटा दिया गया, जिससे चुनाव की निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं।

​संवैधानिक संस्थाओं पर कब्जे का आरोप: उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री और गृह मंत्री ने मिलकर देश की निष्पक्ष संस्थाओं की स्वायत्तता खत्म कर दी है। राहुल गांधी ने तंज कसा कि मुख्य चुनाव आयुक्त की भूमिका के बिना यह सत्ता संरचना संभव ही नहीं थी।

अडानी-अंबानी और बढ़ती आर्थिक असमानता: भाषण में आर्थिक असमानता का मुद्दा उठाते हुए राहुल गांधी ने कहा कि किसानों, मजदूरों और युवाओं को उनका वाजिब हक नहीं मिल रहा है। देश का सारा धन चुनिंदा उद्योगपतियों—अडानी और अंबानी—के हाथों में केंद्रित किया जा रहा है।

​ज्ञानेश कुमार पर कसा तंज: उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि उन्हें मुख्य चुनाव आयुक्त के लिए सहानुभूति महसूस होती है, क्योंकि देश की आत्मा और जनता की आवाज को दबाने के दबाव के कारण वे रात में ठीक से सो भी नहीं पा रहे हैं।

​मोहब्बत और अहिंसा का संदेश: राजनीतिक तीखेपन के बीच उन्होंने दोहराया कि वे प्रधानमंत्री, गृह मंत्री या मुख्य चुनाव आयुक्त से कोई व्यक्तिगत द्वेष या नफरत नहीं रखते। वे ‘मोहब्बत की दुकान’ चलाने में विश्वास रखते हैं और बिना हिंसा के संविधान की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखेंगे।

‘शिव की बारात’ के उदाहरण से समावेशी भारत की परिकल्पना: राहुल गांधी ने भगवान शिव की बारात का अनूठा उदाहरण देते हुए समझाया कि जिस प्रकार उसमें हर जीव-जंतु और वर्ग का समावेश होता है, वैसा ही समावेशी भारत होना चाहिए। उन्होंने कहा कि जहाँ हर जाति, धर्म, वर्ग, दलितों, आदिवासियों, अल्पसंख्यकों, महिलाओं, दिव्यांजनों तथा कतार में खड़े अंतिम व्यक्ति को बराबरी का सम्मान और अवसर मिले—18 घंटे पढ़ने वाले छात्र को रोजगार और किसान को उसकी उपज का पूरा दाम मिले।