आगरा के असगर अली हत्याकांड में ‘ऑपरेशन पूछताछ’ शुरू: मुख्य आरोपी रवि यादव की 14 दिन की जुडिशियल कस्टडी रिमांड मंजूर, खुलेंगे कई राज

Crime

​आगरा: शहर के चर्चित ट्रांसपोर्टर असगर अली हत्याकांड की जांच अब एक नए और निर्णायक मोड़ पर आ गई है। हत्याकांड के मुख्य आरोपी रवि यादव को अदालत से 14 दिन की न्यायिक कस्टडी रिमांड मिलने के बाद अब पुलिस जेल के भीतर ही उससे गहन पूछताछ करेगी। इस पूछताछ से हत्याकांड के पीछे के उन ‘बड़े राज’ के खुलने की उम्मीद है, जो अब तक पर्दे के पीछे थे।

​सीसीटीवी से लेकर AI तक: तकनीकी जांच का जाल

पुलिस ने रवि यादव से पूछताछ के लिए सवालों की एक लंबी फेहरिस्त तैयार की है। हत्याकांड में इस्तेमाल की गई कार और घटना से पहले-बाद की सीसीटीवी फुटेज पुलिस की सबसे बड़ी कड़ी है। इसके साथ ही, इस केस में सामने आए ‘वायरल ऑडियो’ की सत्यता परखने के लिए अब AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) एंगल से जांच की जा रही है। साइबर विशेषज्ञों की टीम यह पता लगाने में जुटी है कि कहीं ऑडियो को किसी तकनीकी साजिश के तहत तो नहीं बनाया गया।

​जीएसटी अधिकारी और पशु कल्याण अधिकारी जांच के घेरे में

इस मामले ने अब प्रशासनिक हलकों में भी खलबली मचा दी है। मृतक असगर अली द्वारा जीएसटी अधिकारी निवेदिता सिंह के खिलाफ की गई शिकायतें और नगर निगम के पशु कल्याण अधिकारी डॉ. अजय यादव का नाम मामले में आने से यह केस और अधिक संवेदनशील हो गया है। पुलिस सूत्रों का कहना है कि रवि यादव के बयानों के आधार पर इन अधिकारियों की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच की जाएगी, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि क्या इस हत्याकांड में प्रशासनिक मिलीभगत या दबाव का कोई बड़ा खेल था।

​फरारी के ‘मददगार’ कौन?

पुलिस अब इस एंगल को भी बारीकी से देख रही है कि रवि यादव को अपनी फरारी के दौरान किसने पनाह दी और किसने उसे सुरक्षित निकलने में मदद की। मोबाइल लोकेशन और कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) के आधार पर कई प्रभावशाली नामों के उजागर होने की संभावना है।

अदालत द्वारा रिमांड मंजूर होने के बाद, आगरा के कारोबारी और प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा हुआ है। रवि यादव के मुंह से निकलने वाला हर नाम इस हत्याकांड की साजिश को और अधिक स्पष्ट करेगा। पुलिस का दावा है कि इस पूरे नेटवर्क का भंडाफोड़ करना ही अब उनकी प्राथमिकता है।