नेपाल की राजनीति में नैतिकता का नया अध्याय: गृह मंत्री सूडान गुरुंग ने आरोपों के बीच दिया इस्तीफा

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काठमांडू। नेपाल की सत्ता की गलियारों से एक बेहद चौंकाने वाली और लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूती देने वाली खबर सामने आई है। देश के गृह मंत्री सूडान गुरुंग ने अपने पद से त्यागपत्र देकर ‘नैतिक जिम्मेदारी’ की एक नई मिसाल पेश की है। हाल के दिनों में पारदर्शिता और वित्तीय मामलों को लेकर उठ रहे सवालों के बीच गुरुंग का यह फैसला नेपाल की राजनीति में एक बड़े बदलाव का संकेत माना जा रहा है।

फेसबुक पोस्ट के जरिए सार्वजनिक किया फैसला

सूडान गुरुंग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर अपने इस्तीफे की घोषणा करते हुए साफ किया कि सार्वजनिक जीवन में जनता का विश्वास ही सबसे बड़ी पूंजी है। उन्होंने उन तमाम वित्तीय आरोपों और चिंताओं को गंभीरता से स्वीकार किया जो पिछले कुछ समय से सार्वजनिक चर्चा का विषय बने हुए थे। गुरुंग ने स्पष्ट संदेश दिया कि वे जांच की शुचिता को बनाए रखने के लिए सत्ता के मोह का त्याग कर रहे हैं।

​’Gen Z’ और पारदर्शिता की नई राजनीति

अपने बयान में गुरुंग ने विशेष रूप से आधुनिक पीढ़ी यानी ‘Gen Z’ का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि आज के युवा पारदर्शिता, जवाबदेही और ईमानदारी पर आधारित राजनीति चाहते हैं। गुरुंग के अनुसार, युवाओं की यह सक्रियता लोकतंत्र के लिए शुभ संकेत है और वे खुद इसी जवाबदेही के रास्ते पर चलते हुए पद का त्याग कर रहे हैं ताकि जांच प्रक्रिया किसी भी तरह के ‘हितों के टकराव’ (Conflict of Interest) से मुक्त रहे।

​सच्चाई की राह और भविष्य के खुलासे

इस्तीफे के साथ ही पूर्व गृह मंत्री ने मीडिया और नागरिकों से अपील की है कि वे हमेशा सत्य के साथ खड़े रहें। उन्होंने एक दिलचस्प संकेत भी दिया कि आने वाले समय में मीडिया जगत के कुछ प्रभावशाली व्यक्तियों के आर्थिक हितों और उनकी संदिग्ध भूमिकाओं से जुड़े खुलासे भी हो सकते हैं। उनका तर्क है कि जब तक व्यवस्था साफ-सुथरी नहीं होगी, तब तक लोकतंत्र मजबूत नहीं होगा।

​नेपाल सरकार में अनुशासन का दौर

गौरतलब है कि नेपाल में भ्रष्टाचार और अनुशासनहीनता के खिलाफ कार्रवाई का सिलसिला थम नहीं रहा है। अभी हाल ही में, 9 अप्रैल को प्रधानमंत्री बालेन शाह ने श्रम मंत्री दीपक कुमार साह को पद से बर्खास्त कर दिया था। उन पर परिवारवाद और अपनी पत्नी को सरकारी पद दिलाने के लिए सत्ता के दुरुपयोग का गंभीर आरोप लगा था। गृह मंत्री का इस्तीफा इसी कड़ी में एक बड़ी घटना है जो यह साबित करती है कि नेपाल में अब राजनेताओं के लिए ‘जवाबदेही’ महज एक शब्द नहीं, बल्कि अनिवार्य शर्त बनती जा रही है।