आगरा: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की सियासी बिसात बिछनी शुरू हो गई है। पश्चिम बंगाल के चुनावी नतीजों से सबक लेते हुए बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने अपनी कार्यशैली में बड़ा बदलाव किया है। मायावती के उत्तराधिकारी और बसपा के राष्ट्रीय समन्वयक आकाश आनंद अब सीधे मैदान में उतरने जा रहे हैं। ताजनगरी आगरा, जो कभी बसपा का अभेद्य किला माना जाता था, वहां आकाश आनंद बड़ी सभाएं कर कार्यकर्ताओं में जोश भरेंगे। स्थानीय पदाधिकारियों ने युवाओं को जोड़ने के लिए आकाश आनंद के कार्यक्रमों की विशेष मांग की है।
जमीनी स्तर पर ‘माइक्रो मैनेजमेंट’
पश्चिम बंगाल में जिस तरह भाजपा ने बूथ स्तर पर काम कर सफलता की इबारत लिखी, उसी ‘बूथ लेवल फॉर्मूले’ को अब बसपा उत्तर प्रदेश में दोहराने जा रही है। पार्टी ने हर विधानसभा क्षेत्र के 40 से 42 सेक्टरों में रोजाना दो बैठकें आयोजित करने का निर्देश दिया है। इन बैठकों का मुख्य उद्देश्य बसपा सरकार के कार्यकाल की उपलब्धियों को घर-घर तक पहुंचाना और सोए हुए समर्थकों को सक्रिय करना है। आगरा की 9 सीटों पर 2007 और 2012 जैसा प्रदर्शन दोहराने के लिए पार्टी कैडर को पूरी तरह झोंक दिया गया है।
ब्राह्मण कार्ड और पुरानी सोशल इंजीनियरिंग की वापसी
बसपा ने अपनी पुरानी ‘सोशल इंजीनियरिंग’ की ओर लौटने का संकेत दिया है। आगामी विधानसभा चुनाव में पार्टी ब्राह्मणों पर बड़ा दांव खेलने की तैयारी में है। सूत्रों के मुताबिक, आगरा की 9 विधानसभा सीटों में से कम से कम 4 सीटों पर ब्राह्मण प्रत्याशियों को उतारा जा सकता है। पार्टी पदाधिकारी हर सीट से 2-3 कद्दावर ब्राह्मण नामों की सूची तैयार कर रहे हैं। इतना ही नहीं, उन पुराने नेताओं को भी वापस लाने की कोशिश की जा रही है जो किसी कारणवश पार्टी का साथ छोड़ गए थे।
आकाश आनंद के कंधों पर युवाओं की जिम्मेदारी
बसपा इस बार केवल पारंपरिक वोटबैंक के भरोसे नहीं है। पार्टी का मानना है कि आकाश आनंद के जरिए युवाओं और तकनीक के साथ चलने वाली नई पीढ़ी को जोड़ा जा सकता है। आगरा में होने वाली आकाश आनंद की सभाएं न केवल शक्ति प्रदर्शन होंगी, बल्कि यह संदेश भी देंगी कि बसपा अब नए कलेवर और नई ऊर्जा के साथ मैदान में है। सेक्टर स्तर की बैठकों और बड़े नेताओं के दौरों ने ताजनगरी के सियासी तापमान को अभी से बढ़ा दिया है।

