ढाई लाख में ‘ममता’ का सौदा: आगरा के सिकंदरा में 2 दिन के नवजात को बेचने की साजिश नाकाम, बुआ और दादी की बहादुरी ने बचाया मासूम

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आगरा: ताजनगरी के शास्त्रीपुरम (सिकंदरा) इलाके में मानवता को शर्मसार करने वाला एक मामला प्रकाश में आया है। यहाँ एक दंपति ने अपने महज दो दिन के नवजात बेटे की कीमत ढाई लाख रुपये लगा दी और उसे एक व्यापारी को बेचने की तैयारी कर ली। लेकिन इस ‘सौदागर ममता’ पर एक दादी का प्यार भारी पड़ा और मासूम का भविष्य बिकने से बच गया।

​अस्पताल पहुंचा था ‘खरीददार’

जानकारी के मुताबिक, मजदूरी करने वाले एक दंपति ने बच्चे के जन्म से पहले ही उसे बेचने का मन बना लिया था। सौदे के तहत कमला नगर का एक व्यापारी बच्चे को ले जाने के लिए अस्पताल तक पहुंच गया था। जब बच्चे की दादी राजकुमारी को इस घिनौनी साजिश की भनक लगी, तो उन्होंने इसका कड़ा विरोध किया। अपनी बात अनसुनी होते देख उन्होंने मेरठ में रह रही अपनी बेटी (बच्चे की बुआ) को फोन कर पूरी बात बताई।

चाइल्डलाइन की 48 घंटे की ‘घेराबंदी’

बुआ ने बिना देर किए चाइल्डलाइन हेल्पलाइन 1098 पर मेरठ से ही शिकायत दर्ज कराई। सूचना मिलते ही चाइल्डलाइन समन्वयक ब्रजेश कुमार गौतम के नेतृत्व में टीम और पुलिस अस्पताल पहुंच गई। डर था कि कहीं टीम की नजर हटते ही बच्चा गायब न कर दिया जाए, इसलिए टीम ने लगातार दो दिनों तक अस्पताल के बाहर पहरा दिया।

CWC के सामने पेशी और सख्त चेतावनी

सोमवार को इस मामले में कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ी। नवजात और उसके माता-पिता को बाल कल्याण समिति (CWC) के समक्ष पेश किया गया। समिति ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए दंपति से एक सख्त शपथपत्र भरवाया है कि वे भविष्य में बच्चे को किसी को भी अवैध रूप से नहीं सौंपेंगे। फिलहाल बच्चा माता-पिता को दे दिया गया है, लेकिन शर्त रखी गई है कि 15 दिन बाद बच्चे को दोबारा समिति के सामने स्वस्थ हालत में पेश करना होगा।

​साजिश या सच?

हैरानी की बात यह है कि पूछताछ के दौरान दंपति ने बच्चे को बेचने के सभी आरोपों को सिरे से नकार दिया और इसे रिश्तेदारों की आपसी रंजिश बताया। हालांकि, चाइल्डलाइन और पुलिस की मुस्तैदी ने एक संभावित मानव तस्करी (Child Trafficking) के मामले को नाकाम कर दिया।

दादी राजकुमारी अब अपने पोते को घर पाकर बेहद खुश हैं। उनकी सूझबूझ ने साबित कर दिया कि लालच के इस दौर में भी ममता की रक्षक ‘ममता’ ही होती है।