आगरा: ताजनगरी में निवेश के नाम पर संगठित ठगी का एक ऐसा गिरोह सक्रिय है जो साधारण निवेशकों को शिकार बनाने के लिए ‘कॉरपोरेट स्टाइल’ का सहारा ले रहा है। फाइव स्टार होटलों में भव्य सेमिनार और प्रोफेशनल प्रेजेंटेशन के जरिए लोगों को 20 महीने में पैसा दोगुना करने का लालच देकर लाखों की चपत लगाई जा रही है।
कैसे शुरू हुआ ठगी का खेल?
शमसाबाद रोड निवासी प्रदीप कुमार उपाध्याय इस सुनियोजित जाल के ताजा शिकार बने हैं। प्रदीप की मुलाकात जुलाई 2025 में संजय प्लेस स्थित शंकर प्रसाद गुप्ता से हुई। शंकर ने उन्हें “सी प्राइम कैपिटल एलएलसी” नामक कंपनी में निवेश का प्रस्ताव दिया। भरोसा जीतने के लिए प्रदीप को देहरादून के एक नामचीन होटल में आयोजित सेमिनार में ले जाया गया, जहाँ कंपनी के आलीशान प्रेजेंटेशन को देखकर प्रदीप ने ₹10 लाख और उनके दो साथियों ने ₹2 लाख का निवेश कर दिया।
MT-5 ऐप: आँखों में धूल झोंकने का हथियार
निवेश के बाद आरोपियों ने प्रदीप के मोबाइल में “MT-5” नाम का एक ट्रेडिंग ऐप डाउनलोड करवाया। इस ऐप में प्रदीप को एक आईडी दी गई, जिसमें उन्हें उनका निवेश और उस पर मिलने वाला ‘मोटा मुनाफा’ हर दिन बढ़ता हुआ दिखाई देता था। इसी आभासी (Virtual) मुनाफे के झांसे में आकर प्रदीप निश्चिंत रहे।
जब मांगा पैसा, तो उड़े होश
ठगी का अहसास तब हुआ जब प्रदीप ने अपनी मूल रकम और मुनाफा निकालना चाहा। कंपनी के लोग बहाने बनाने लगे और फिर संपर्क तोड़ दिया। जब प्रदीप ने खुद इस कंपनी की पड़ताल की, तो पता चला कि यह कंपनी भारत में निवेश या ट्रेडिंग के लिए RBI या SEBI से अधिकृत ही नहीं है।
पुलिस की जांच और चेतावनी:
प्रदीप की शिकायत पर साइबर क्राइम थाना पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर मुख्य आरोपी शंकर प्रसाद गुप्ता और उसके नेटवर्क की तलाश शुरू कर दी है। पुलिस को अंदेशा है कि इस गिरोह के तार अंतरराज्यीय स्तर पर जुड़े हो सकते हैं और सैकड़ों लोग इनके झांसे में आए होंगे।
विशेषज्ञों की सलाह: निवेश से पहले रखें इन बातों का ध्यान
सेबी (SEBI) रजिस्ट्रेशन चेक करें: किसी भी निवेश कंपनी का SEBI की वेबसाइट पर रजिस्टर्ड होना अनिवार्य है।
फर्जी ऐप्स से बचें: केवल गूगल प्ले स्टोर या ऐप स्टोर के आधिकारिक और सत्यापित ट्रेडिंग ऐप्स का ही प्रयोग करें। किसी के कहने पर अनजान फाइल (APK) डाउनलोड न करें।
अत्यधिक मुनाफे का लालच: यदि कोई कंपनी 20 महीने में पैसा दोगुना करने का वादा करती है, तो वह 99% पोंजी स्कीम या ठगी हो सकती है।
दिखावे पर न जाएं: फाइव स्टार होटल में सेमिनार या लग्जरी गाड़ियां ठगों का मुख्य हथियार होती हैं ताकि वे खुद को विश्वसनीय दिखा सकें।

