आगरा: स्पेशल कोर्ट एमपी-एमएलए (न्यायाधीश अनुज कुमार सिंह) की अदालत में भाजपा सांसद कंगना रनौत के विरुद्ध चल रहे मामले में उनकी अधिवक्ता को असहज स्थिति का सामना करना पड़ा। अदालत की निष्पक्षता पर सवाल उठाने और गलत तथ्य पेश करने के कारण कंगना की वकील सुधा प्रधान को कई बार हाथ जोड़कर कोर्ट से माफी मांगनी पड़ी।
न्यायालय पर लगाया था ‘पक्षपात’ का आरोप
पूरा विवाद कंगना की अधिवक्ता द्वारा पेश किए गए एक प्रार्थना पत्र से शुरू हुआ। इस पत्र में आरोप लगाया गया था कि 16 अप्रैल 2026 को अदालत ने वादी पक्ष (शिकायतकर्ता) को ‘इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एक्ट’ पर बहस करने का अतिरिक्त अवसर देकर अनुचित लाभ पहुँचाया है। साथ ही यह भी दावा किया गया कि 16 अप्रैल की तारीख फैसले के लिए तय थी, लेकिन निर्णय पारित नहीं किया गया।
अदालत ने पूछा— “किस आधार पर लिखे ये आरोप?”
सुनवाई के दौरान न्यायाधीश ने इन आरोपों पर सख्त नाराजगी जताई। कोर्ट ने पूछा कि जब 16 अप्रैल को न तो आईटी एक्ट पर कोई बहस हुई और न ही वह तारीख फैसले के लिए नियत थी, तो प्रार्थना पत्र में ऐसी गलत बातें क्यों लिखी गईं? अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि पत्रावली (फाइल) में केवल प्रपत्रों पर ‘फ्लैग’ लगाए गए थे ताकि पढ़ने में सुविधा हो, जो कि दोनों पक्षों की सहमति से हुआ था।
माफीनामा और अगली तारीख
वादी के वरिष्ठ अधिवक्ता रमाशंकर शर्मा ने कोर्ट से मांग की कि न्यायालय की छवि धूमिल करने के प्रयास में विपक्षी (कंगना पक्ष) के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जाए। जब कोर्ट ने पूछा कि क्या उन्होंने प्रस्तुत प्रपत्रों की कॉपी वादी पक्ष को दी, तो कंगना की वकील के पास कोई संतोषजनक जवाब नहीं था। अपनी गलती स्वीकार करते हुए अधिवक्ता ने बार-बार माफी मांगी।
अदालत ने अब मामले की अगली सुनवाई के लिए 20 मई 2026 की तिथि तय की है और विपक्षी पक्ष को अपने प्रपत्र प्रस्तुत करने का अंतिम अवसर दिया है।


