नई दिल्ली: संसद के बजट सत्र के दौरान ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ (महिला आरक्षण विधेयक) को लेकर सियासत गरमा गई है। केंद्र सरकार द्वारा सांसदों के साथ 131वां संविधान संशोधन विधेयक मसौदा 2026 साझा किए जाने के बाद संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष को कड़े शब्दों में चेतावनी दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस ऐतिहासिक कदम के पीछे कोई राजनीतिक लाभ नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने का संकल्प है।
‘विपक्ष न करे विरोध की गलती’
एक न्यूज़ चैनल से बातचीत में रिजिजू ने तीखे अंदाज में कहा, “नारी शक्ति वंदन अधिनियम किसी राजनीतिक उद्देश्य के लिए नहीं लाया गया है। महिलाओं को आरक्षण देना ही था, इसे कब तक टाला जाता? विपक्ष इसका विरोध करने की गलती न करे, वरना उनका पूरा शरीर काले रंग में रंग जाएगा और वे जनता को मुंह दिखाने लायक नहीं रहेंगे।” उन्होंने संकेत दिया कि महिलाओं के हक का विरोध करने वाली पार्टियों को देश की मातृशक्ति कभी माफ नहीं करेगी।
चुनाव से जोड़ने के आरोपों पर पलटवार
विपक्ष के उन आरोपों पर कि सरकार चुनाव के लिए यह बिल लाई है, रिजिजू ने कहा, “यह तर्क पूरी तरह गलत है। भारत में हर कुछ महीनों में कहीं न कहीं चुनाव होते ही रहते हैं। अगर हम अभी इसे नहीं लाते, तो पांच महीने बाद किसी और राज्य के चुनाव का बहाना बनाया जाता। यह टालमटोल की राजनीति अब नहीं चलेगी।”
जनगणना और ओबीसी कोटे के सवाल पर जवाब
जब उनसे पूछा गया कि सरकार ने 2027 की जनगणना का इंतजार क्यों नहीं किया और इसमें ओबीसी (OBC) कोटा क्यों शामिल नहीं है, तो उन्होंने कहा, “अभी छोटे-छोटे मुद्दों या तकनीकी बारीकियों में उलझने का समय नहीं है। मुख्य लक्ष्य महिलाओं को उनका अधिकार देना है, जो प्रधानमंत्री मोदी जी के नेतृत्व में पूरा हो रहा है। सरकार चाहती है कि सभी दल एकजुट होकर इसका समर्थन करें।”
सोनिया गांधी को दिया करारा जवाब
सोनिया गांधी की प्रतिक्रिया पर तंज कसते हुए रिजिजू ने कहा, “देश की जनता ने नरेंद्र मोदी को चुना है और फैसले लेने का हक उन्हीं का है, विपक्ष का नहीं। देश में अब कांग्रेस की नहीं, बीजेपी की सरकार है। फैसले पीएम मोदी ही करेंगे।”

