आगरा। भारतीय संस्कृति में गुरु को साक्षात ब्रह्मा, विष्णु और महेश का स्वरूप माना गया है। गुरु ही वह दीप है, जो अज्ञान के अंधकार को दूर कर ज्ञान का प्रकाश फैलाता है। किसी भी राष्ट्र का भविष्य उसके शिक्षकों के हाथों में होता है, क्योंकि शिक्षक केवल पाठ्यक्रम नहीं पढ़ाता, बल्कि संस्कार, चरित्र, अनुशासन और राष्ट्रभक्ति की भावना का निर्माण करता है। यही कारण है कि गुरु का सम्मान वस्तुतः राष्ट्र के भविष्य का सम्मान है।
इसी महान उद्देश्य को लेकर तारक सेवा संस्था, वाराणसी एवं बेसिक एजुकेशन मूवमेंट ऑफ इंडिया के संयुक्त तत्वावधान में पहली बार आगरा में प्रदेश स्तरीय भव्य शिक्षक सम्मान समारोह एवं अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित की जा रही है। इस आयोजन में उत्तर प्रदेश के विभिन्न जनपदों से चयनित साढ़े चार सौ से अधिक शिक्षकों को सम्मानित किया जाएगा।
आयोजन की तैयारियों के क्रम में ललित कला संस्थान में समारोह के आमंत्रण पत्र का विमोचन किया गया। इस अवसर पर तारक सेवा संस्था के अध्यक्ष प्रो. उमापति दीक्षित ने बताया कि बेसिक एजुकेशन मूवमेंट ऑफ इंडिया के अध्यक्ष डॉ. राजेश शर्मा पिछले 27 वर्षों से लगातार इस प्रतिष्ठित समारोह का आयोजन कर रहे हैं। इस वर्ष इसका 28वाँ संस्करण आयोजित हो रहा है और पहली बार आगरा को इसकी मेजबानी का सौभाग्य मिला है।
उन्होंने बताया कि समारोह 9 अगस्त (रविवार) प्रातः 11 बजे जेपी सभागार, खंदारी परिसर में आयोजित होगा। इससे पूर्व यह आयोजन कई बार लखनऊ स्थित राजभवन में भी संपन्न हो चुका है। आगरा में होने वाला यह आयोजन शिक्षा, साहित्य और संस्कृति के क्षेत्र का एक ऐतिहासिक आयोजन होगा।
प्रो. लवकुश मिश्रा ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति की सफलता की नींव बेसिक शिक्षा से पड़ती है। प्राथमिक विद्यालय का शिक्षक ही विद्यार्थी को जीवन की पहली शिक्षा, अनुशासन और संस्कार देता है। यही विद्यार्थी आगे चलकर डॉक्टर, इंजीनियर, वैज्ञानिक, प्रशासक, न्यायाधीश, साहित्यकार और शिक्षक बनता है। इसलिए शिक्षा व्यवस्था में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका बेसिक शिक्षा के शिक्षक की होती है। इसी भावना के साथ इस समारोह में बेसिक शिक्षा से लेकर माध्यमिक, महाविद्यालय और विश्वविद्यालय स्तर तक के उत्कृष्ट शिक्षकों को सम्मानित किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में शिक्षा के साथ भारतीय साहित्य, संस्कृति और नैतिक मूल्यों का संरक्षण भी अत्यंत आवश्यक है। इसी उद्देश्य से समारोह में “साहित्य एवं संस्कृति” विषय पर अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित होगी, जिसमें देश-विदेश के विद्वान अपने विचार प्रस्तुत करेंगे। साथ ही विभिन्न विषयों पर लिखी गई एक दर्जन से अधिक पुस्तकों का लोकार्पण भी किया जाएगा।
वक्ताओं ने कहा कि शिक्षक समाज का वह शिल्पकार है, जो आने वाली पीढ़ियों का निर्माण करता है। यदि शिक्षक सशक्त होगा तो समाज संस्कारित होगा और राष्ट्र प्रगतिशील बनेगा। इसलिए शिक्षकों का सम्मान केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि ज्ञान, संस्कृति और राष्ट्र निर्माण की गौरवशाली परंपरा का अभिनंदन है।
आमंत्रण पत्र विमोचन के इस गरिमामयी अवसर पर प्रो. हरिवंश पांडे, हेमंत द्विवेदी और डॉ. भोजराज शर्मा सहित शिक्षा जगत से जुड़े कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।


