आगरा: भारतीय जनता पार्टी की आगरा महानगर और जिला इकाइयों के पुनर्गठन की प्रक्रिया अब अपने निर्णायक दौर में पहुँच गई है। जिलाध्यक्षों और पर्यवेक्षकों की ओर से नामों की सूची लखनऊ स्थित प्रदेश कार्यालय भेज दी गई है। अब सारा दारोमदार प्रदेश नेतृत्व पर है, जहाँ जातीय समीकरणों, क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व और बड़े नेताओं की सिफारिशों को बारीकी से परखा जा रहा है। संगठन के इस पुनर्गठन को लेकर आगरा के सियासी गलियारों में भारी उत्सुकता और हलचल बनी हुई है।
सिफारिशों और तिकड़मों का दौर
संगठन में पद पाने के लिए दावेदारों ने एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया है। आलम यह है कि अपनी बात मनवाने के लिए सक्रिय राजनीति से संन्यास ले चुके दिग्गज नेताओं के जरिए भी सिफारिशें कराई जा रही हैं। सांसदों और विधायकों ने भी अपने-अपने क्षेत्रों से अधिक से अधिक समर्थकों को पदाधिकारी बनवाने के लिए प्रदेश स्तर पर पैरोकारी शुरू कर दी है।
महिला सशक्तिकरण पर विशेष फोकस
पार्टी नेतृत्व ने इस बार संगठन में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए सख्त निर्देश दिए हैं। प्रत्येक जिला इकाई में 7 महिला पदाधिकारियों का होना अनिवार्य किया गया है। इसके जरिए भाजपा आधी आबादी को साधने और महिला सशक्तिकरण का बड़ा संदेश देने की तैयारी में है।
19 पदों का जटिल समीकरण
कार्यकारिणी के गठन में सबसे बड़ी चुनौती ‘सीमित पद और असीमित दावेदार’ की है। जिले की 19 सदस्यीय कार्यकारिणी में से:
07 पद: महिलाओं के लिए आरक्षित।
02 पद: अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित।
शेष 10 पद: इन्हीं पदों पर सवर्ण समाज और पिछड़ा वर्ग (OBC) के बीच संतुलन बिठाना प्रदेश नेतृत्व के लिए टेढ़ी खीर साबित हो रहा है।
विधायकों और सांसदों की राय पर मंथन
महानगर कार्यकारिणी के लिए पर्यवेक्षकों ने शहर के चारों विधायकों और सांसद प्रो. एसपी सिंह बघेल से फीडबैक लिया है। वहीं, जिला इकाई के लिए सांसद राजकुमार चाहर सहित बाह, फतेहाबाद, खेरागढ़ और फतेहपुर सीकरी के विधायकों की राय को भी सूची में शामिल किया गया है। माना जा रहा है कि जिला भाजपा में कुछ पदों को लेकर चल रही खींचतान के कारण सूची में मामूली फेरबदल हो सकता है, जबकि महानगर इकाई की घोषणा किसी भी समय की जा सकती है।


