नई दिल्ली: लोकसभा में महिला आरक्षण विधेयक पर चर्चा के दौरान समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने केंद्र सरकार पर जमकर हमला बोला। सदन में अपनी बात रखते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि समाजवादी पार्टी सैद्धांतिक रूप से महिला आरक्षण के समर्थन में है, क्योंकि सपा ने हमेशा महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित की है। हालांकि, उन्होंने भाजपा की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि सत्ता पक्ष “नारी” को केवल एक चुनावी “नारा” बनाना चाहता है।
संगठन और सत्ता में भागीदारी पर उठाए सवाल
अखिलेश यादव ने आंकड़ों के जरिए भाजपा को घेरते हुए पूछा कि जिन 21 राज्यों में भाजपा की सरकारें हैं, वहां कितनी महिला मुख्यमंत्री हैं? उन्होंने दिल्ली की मुख्यमंत्री का उदाहरण देते हुए कटाक्ष किया कि वह एक “हाफ सीएम” (आधी मुख्यमंत्री) हैं, क्योंकि दिल्ली के पास पूर्ण राज्य जैसे अधिकार ही नहीं हैं। उन्होंने तीखे लहजे में कहा कि जो संगठन अपनी संरचना में महिलाओं को उचित स्थान नहीं दे सका, वह उनके मान-सम्मान की रक्षा का दावा कैसे कर सकता है?
जाति जनगणना और आरक्षण का पेंच
कन्नौज सांसद ने भाजपा पर जनगणना से भागने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण लागू करने की जल्दबाजी के पीछे का असली सच जनगणना को टालना है। अखिलेश के मुताबिक, सरकार जाति जनगणना से इसलिए डर रही है क्योंकि इसके बाद आरक्षण का असली सवाल खड़ा हो जाएगा। उन्होंने इसे भाजपा की “चुनावी घपलेबाजी” करार देते हुए कहा कि जिस तरह यूपी में एसआईआर के जरिए वोट काटने की साजिश हुई, वैसा ही कुछ खेल यहाँ भी दिख रहा है।
महंगाई और जमीनी हकीकत का हवाला
भाजपा की राजनीतिक चालों पर प्रहार करते हुए सपा प्रमुख ने कहा कि यह बिल केवल वोट बैंक की राजनीति का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि आज देश की महिलाएं महंगाई से सबसे ज्यादा त्रस्त हैं। रसोई सूनी हो चुकी है और रसोई गैस के बढ़ते दामों ने आम महिला की कमर तोड़ दी है। आज मजदूर और महिलाएं हक के लिए सड़कों पर हैं, लेकिन सरकार केवल कागजी दांव खेल रही है।
पिछड़ों और अल्पसंख्यकों के हक की मांग
अपनी बात खत्म करते हुए अखिलेश यादव ने मांग की कि आरक्षण के आंकड़े तभी सटीक होंगे जब जनगणना पारदर्शी होगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि बिना जनगणना के परिसीमन करना गलत है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में “आधी आबादी” के भीतर पिछड़े वर्ग (OBC) और मुस्लिम महिलाओं के लिए अलग से कोटे की मांग उठाई, ताकि आरक्षण का लाभ समाज के अंतिम पायदान तक पहुँच सके।

