आगरा में ‘फाइनेंस माफिया’ का नंगा नाच: बीमार मां को अस्पताल ले जा रहे युवक की बीच सड़क छीनी बाइक, बोले- थाने को 50 हजार महीना देते हैं…

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आगरा में लोन वसूली के नाम पर कथित गुर्गों की दबंगई का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। अपनी बीमार मां को अस्पताल ले जा रहे युवक को रास्ते में रोककर 10-12 लोगों ने उसकी बाइक जबरन छीन ली। विरोध करने पर गाली-गलौज और मारपीट की गई, इतना ही नहीं युवक से दबाव में वीडियो भी बनवाया गया कि वह अपनी मर्जी से अपनी बाइक दे रहा है। पीड़ित परिवार का आरोप है कि गुर्गों ने खुद को फाइनेंस कंपनी का रिकवरी एजेंट बताते हुए 65 हजार रुपये लाने पर ही बाइक लौटाने की बात कही। घटना के बाद पीड़ित परिवार ने थाना खंदौली में तहरीर देकर कार्रवाई की मांग की है।

आगरा। बैंकों और फाइनेंस कंपनियों द्वारा लोन वसूली के लिए बाहुबलियों के इस्तेमाल पर सुप्रीम कोर्ट और विभिन्न उच्च न्यायालय पहले ही सख्त टिप्पणी कर चुके हैं। अदालतों ने स्पष्ट कहा है कि वित्तीय संस्थाएं दबंगों के जरिए राह चलते वाहन जब्त नहीं करा सकतीं। इसके बावजूद आगरा में बुधवार को सामने आया मामला इन आदेशों को ठेंगा दिखाता नजर आया।

पीड़िता गुड्डी देवी ने रालोद के जिला सचिव आशीष शर्मा के लेटरहेड पर थाना खंदौली पुलिस को दी तहरीर में बताया कि वह अपने पुत्र हरेंद्र के साथ अपाचे बाइक नंबर यूपी80एचडी3537 से खंदौली से टेड़ी बगिया अस्पताल जा रही थीं।

जैसे ही वे यमुना एक्सप्रेसवे के नीचे पहुंचे, वहां पहले से खड़े 10-12 अज्ञात लोगों ने उन्हें रोक लिया। आरोप है कि इन लोगों ने खुद को फाइनेंस कंपनी का रिकवरी एजेंट बताते हुए बाइक छोड़ने के लिए कहा।

तहरीर के अनुसार जब हरेंद्र और उनकी मां ने विरोध किया और बताया कि वे इलाज के लिए अस्पताल जा रहे हैं, तब भी आरोपित नहीं माने। उल्टा गाली-गलौज करते हुए मारपीट की और जबरन बाइक छीनकर ले गए। इसी दौरान एक युवक ने अपना नाम नितिन निवासी नगला मट्टू बताया और कहा कि वह रिकवरी का काम करता है।

गुड्डी देवी के पुत्र हरेंद्र, जो मुड़ी चौराहा निवासी महेंद्र सिंह के पुत्र हैं, ने बताया कि गुर्गों ने बाइक कब्जे में लेने के बाद उससे जबरन एक वीडियो भी बनवाया। वीडियो में उससे यह कहलवाया गया कि वह स्वेच्छा से अपनी बाइक दे रहा है। हरेंद्र का कहना है कि दबाव और डर के कारण उसे ऐसा कहना पड़ा।

पीड़ित युवक का आरोप है कि बाइक छीनने के बाद आरोपितों ने कहा कि 65 हजार रुपये लेकर गौरव मेडिकल स्टोर पर पहुंच जाना, वहां पैसे देने के बाद ही बाइक वापस मिलेगी।

जब हरेंद्र ने पुलिस से शिकायत की बात कहते हुए उनसे पूछा कि उनके पास कोई पहचान पत्र है जिससे साबित हो सके कि वे फाइनेंसर के लोग हैं, तो आरोपितों ने कथित तौर पर धमकी देते हुए कहा- पुलिस से चाहे तो फोन कर ले, हम थाने को हर महीने 50 हजार रुपये देते हैं, तू कुछ नहीं कर पाएगा।

घटना के बाद पीड़ित परिवार ने थाना खंदौली पुलिस को तहरीर देकर पूरे मामले की शिकायत की है और आरोपितों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।