आगरा। ताजनगरी के 203 वर्ष पुराने ऐतिहासिक शिक्षण संस्थान, आगरा कॉलेज की अरबों रुपये की भूमि और परिसंपत्तियों को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। कॉलेज के शिक्षकों के संगठन स्टाफ क्लब ने कॉलेज की जमीन को हथियाने या हस्तांतरित करने के किसी भी प्रयास के खिलाफ आर-पार की जंग का ऐलान कर दिया है। स्टाफ क्लब ने दो-टूक कहा है कि कॉलेज की एक इंच भूमि भी किसी बाहरी कार्य के लिए नहीं दी जाएगी।
क्या है पूरा विवाद?
सूत्रों के अनुसार, शहर के एक व्यापारिक संगठन ने शासन को एक प्रस्ताव भेजा है, जिसमें आगरा कॉलेज के थॉमसन हॉस्टल से होकर राजामंडी के दरियानाथ मंदिर तक एक नया रास्ता बनाने के लिए कॉलेज की भूमि हस्तांतरित करने की मांग की गई है। जैसे ही इस ‘कुत्सित प्रयास’ की भनक स्टाफ क्लब को लगी, शिक्षकों के तेवर तल्ख हो गए। स्टाफ क्लब के सचिव प्रोफेसर विजय कुमार सिंह ने इसे शिक्षा विरोधी मानसिकता करार दिया है।
340 बीघा जमीन और 20 हजार छात्र
स्टाफ क्लब ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर स्पष्ट किया कि ऐतिहासिक दस्तावेजों के अनुसार कॉलेज के पास कुल 340 बीघा भूमि है। नागरी प्रचारिणी से लेकर राजा की मंडी तक की भूमि एक ही खसरा नंबर में दर्ज है, जिसका विधिक स्वामित्व कॉलेज के पास है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि किसी ने इस पर कब्जा करने की कोशिश की, तो कॉलेज के 200 शिक्षक, 1000 कर्मचारी और 20,000 छात्र सड़कों पर उतरने को मजबूर होंगे।
मेट्रो और पुराने जख्म
विज्ञप्ति में पूर्व के अनुभवों का भी जिक्र किया गया। आरोप लगाया गया कि मेट्रो रेल कॉरपोरेशन ने पूर्व प्राचार्य की मिलीभगत से कॉलेज का बहुमूल्य क्रीड़ांगन (Ground) बिना किसी वैध प्रक्रिया और उचित मुआवजे के ले लिया था। स्टाफ क्लब अब उस भूमि को वापस दिलाने और राजा की मंडी से सटी जमीन को अवैध कब्जों से मुक्त कराने की मांग कर रहा है।
यूनिवर्सिटी बनने की राह में रोड़ा
स्टाफ क्लब का तर्क है कि आगरा कॉलेज वर्तमान में राज्य या केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा प्राप्त करने के लिए प्रयासरत है। ऐसे में भविष्य की जरूरतों को देखते हुए मौजूदा भूमि और बुनियादी ढांचा भी कम पड़ सकता है। ऐसे में जनहित के नाम पर कॉलेज की जमीन का बंदरबांट कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
दिग्गज पूर्व छात्रों से अपील
स्टाफ क्लब ने कॉलेज के उन प्रतिष्ठित पूर्व छात्रों से भी हस्तक्षेप की अपील की है जो वर्तमान में सत्ता के शीर्ष पर हैं। इनमें प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय और केंद्रीय मंत्री प्रो. एस. पी. सिंह बघेल (जो कॉलेज के सेवानिवृत्त शिक्षक भी हैं) शामिल हैं। उनसे आग्रह किया गया है कि वे कॉलेज की भूमि का संरक्षण सुनिश्चित करें।

