मुंबई (अनिल बेदाग): माया नगरी मुंबई के बांद्रा स्थित उत्तर भारतीय संघ के परिसर में 28 और 29 मार्च को फैशन, कला और सामाजिक चेतना का एक अद्भुत नजारा देखने को मिला। अवसर था “मेड इन इंडिया स्वदेशी रनवे सीजन 8” का, जिसने अपनी भव्यता और उद्देश्यपरक प्रस्तुति से दर्शकों का दिल जीत लिया। इस दो दिवसीय आयोजन में देशभर से आए 500 से अधिक मॉडलों ने रैंप पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया, जिससे यह मंच उभरते हुए सितारों के लिए एक लॉन्चपैड साबित हुआ।
कला और तकनीक का महासंगम
आईएमएफएल (मॉडलिंग, फैशन और लाइफस्टाइल संस्थान) के सहयोग से आयोजित इस शो का मुख्य ध्येय ‘स्वदेशी’ उत्पादों और भारतीय कारीगरी को वैश्विक पहचान दिलाना था। रनवे डायरेक्टर दीप्ति वोरा और उनकी टीम के नेतृत्व में इस शो को कुशलतापूर्वक संचालित किया गया। कार्यक्रम की सफलता के पीछे 200 मेकअप आर्टिस्ट, 20 प्रतिष्ठित फैशन डिजाइनर और 50 से अधिक स्टाइलिस्टों की कड़ी मेहनत रही, जिन्होंने मिलकर स्वदेशी परिधानों को एक आधुनिक और अंतरराष्ट्रीय लुक दिया।
डॉ. कलाम की विरासत और सोनिया मेयर्स का विजन
इस गरिमामयी शो की परिकल्पना सोनिया मेयर्स द्वारा की गई है, जिन्हें इस पहल के लिए बॉलीवुड, सरकार और फैशन जगत का पुरजोर समर्थन प्राप्त हुआ। सोनिया मेयर्स, जो 2017 से संचालित ‘डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम भारत पुरस्कार’ की संस्थापक भी हैं, ने इस बार कार्यक्रम में डॉ. कलाम के परिवार को आमंत्रित कर इसे और भी ऐतिहासिक बना दिया।
रैंप से समाज सुधार तक का सफर
इस आयोजन की सबसे बड़ी विशिष्टता इसका सामाजिक सरोकार रहा। यह केवल कपड़ों की नुमाइश तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें गंभीर सामाजिक मुद्दों को प्रमुखता दी गई:
सशक्तिकरण: मंच के जरिए ट्रांसजेंडर समुदाय की गरिमा और उनके अधिकारों की आवाज उठाई गई।
जागरूकता: पुलिस हेल्पलाइन को बढ़ावा देने के लिए विशेष संदेश प्रसारित किए गए।
सम्मान: भारतीय सेना और पुलिस के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए इसे एक राष्ट्रभक्ति से ओत-प्रोत कार्यक्रम का रूप दिया गया।
कुल मिलाकर, मेड इन इंडिया स्वदेशी रनवे सीजन 8 ने यह साबित कर दिया कि फैशन केवल चमक-धमक का नाम नहीं है, बल्कि यह समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का एक सशक्त जरिया भी बन सकता है।

