आगरा के ‘फेफड़ों’ पर धूल का पहरा: पालीवाल पार्क की दुर्दशा पर आर-पार की जंग, पर्यावरण प्रहरी ने दी आमरण अनशन की चेतावनी

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आगरा: ताजनगरी के हृदय स्थल और मॉर्निंग वॉकर्स की पहली पसंद ‘पालीवाल पार्क’ इन दिनों सियासत और प्रशासनिक लापरवाही का अखाड़ा बन गया है। पार्क में पिछले सात महीनों से फैली निर्माण सामग्री और उससे उड़ती धूल ने क्षेत्रीय नागरिकों का दम घोंट दिया है। अब इस मुद्दे पर पर्यावरण प्रहरी प्रदीप खंडेलवाल ने प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए ‘आमरण अनशन’ का ऐलान कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि यदि 4 दिनों के भीतर समाधान नहीं हुआ, तो वे भूख हड़ताल पर बैठ जाएंगे।

​7 महीने से सड़क पर पड़ा मलबा, नगर निगम मौन

प्रदीप खंडेलवाल का गंभीर आरोप है कि पार्क के अंदर मुख्य रास्तों पर निर्माण सामग्री (गिट्टी, डस्ट और मलबा) महीनों से लावारिस पड़ी है। इससे न केवल टहलने वालों को चोट लगने का डर रहता है, बल्कि उड़ने वाली धूल फेफड़ों के लिए घातक साबित हो रही है। खंडेलवाल ने इसे नगर निगम की घोर अनदेखी और ठेकेदार की मनमानी करार दिया है। उन्होंने कहा कि पार्क जैसी शांत और स्वच्छ जगह को कूड़ाघर और गोदाम बना दिया गया है।

​पत्राचार की फाइलों में दबा समाधान

हैरानी की बात यह है कि राजकीय उद्यान अधीक्षक इस समस्या को लेकर नगर निगम को दो बार लिखित पत्र भेज चुके हैं, लेकिन अधिकारियों के कान पर जूं तक नहीं रेंगी। प्रशासन और नगर निगम के बीच समन्वय की कमी का खामियाजा आम जनता भुगत रही है। खंडेलवाल ने चेतावनी दी है कि वे इस संबंध में जिलाधिकारी और पुलिस कमिश्नर को सूचना देकर अनिश्चितकालीन अनशन शुरू करेंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी आगरा प्रशासन और उद्यान विभाग की होगी।

स्थानीय लोगों में पनपा भारी आक्रोश

पालीवाल पार्क में रोजाना हजारों की संख्या में लोग शुद्ध हवा के लिए आते हैं, लेकिन वर्तमान स्थिति इसके उलट है। स्थानीय निवासियों और वरिष्ठ नागरिकों का कहना है कि हरियाली के बीच कंक्रीट और धूल का साम्राज्य देखना चिंताजनक है। पार्क की स्वच्छता और सुंदरता को ताक पर रखकर किए जा रहे इस ‘कथित विकास’ ने लोगों के सब्र का बांध तोड़ दिया है।