आगरा। साइबर अपराधियों ने अब तकनीक को मनोविज्ञान के साथ जोड़कर ठगी का एक ऐसा ‘मुनाफे वाला जाल’ बुना है, जिसमें पढ़े-लिखे लोग भी आसानी से फंस रहे हैं। ताजनगरी में पिछले कुछ दिनों में दो बड़े मामले सामने आए हैं, जहाँ व्हाट्सएप और फेसबुक के जरिए निवेश का झांसा देकर दो लोगों से करीब 1 करोड़ रुपये की उगाही कर ली गई। ठगों ने पहले फर्जी प्रॉफिट दिखाकर भरोसा जीता और फिर जीवनभर की जमापूंजी डकार ली। पुलिस ने दोनों मामलों में FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
केस 1: व्हाट्सएप ग्रुप में ‘मुनाफे’ की नुमाइश और 57.5 लाख का चूना
ताजगंज निवासी पुलकित गोयल को एक व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए निशाना बनाया गया। ग्रुप में ‘सानिया जोशी’ नाम की एक महिला निवेश के बड़े-बड़े दावे कर रही थी। ग्रुप के अन्य सदस्य (जो संभवतः ठगों के ही साथी थे) लगातार फर्जी मुनाफे के स्क्रीनशॉट साझा कर रहे थे। इस ‘सोशल प्रूफ’ के जाल में फंसकर पुलकित ने जनवरी से फरवरी के बीच 57.5 लाख रुपये निवेश कर दिए। जब उन्होंने अपनी रकम निकालनी चाही, तो विड्रॉल ब्लॉक कर दिया गया और बदले में और पैसों की मांग की गई।
केस 2: फेसबुक की दोस्ती पड़ी महंगी, गंवाए 45.52 लाख रुपये
पिनाहट के भदरौली निवासी दिग्विजय सिंह तोमर के साथ हुई ठगी का तरीका थोड़ा अलग था। यहाँ फेसबुक पर पहले दोस्ती की गई, फिर व्हाट्सएप पर घंटों बातचीत कर ‘रिलेशनशिप ट्रैप’ बुना गया। खुद को ट्रेडिंग एक्सपर्ट बताने वाले ठग ने तोमर को निवेश की सलाह दी। भरोसा इतना गहरा था कि उन्होंने मार्च के महज 13 दिनों के भीतर 45.52 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए। अंत में, जब पैसे निकालने की बारी आई, तो ठग ने 30% अतिरिक्त फीस की मांग शुरू कर दी।
ठगों का ‘ट्रैप मॉडल’: फंसाना → भरोसा → निवेश
इन दोनों वारदातों ने ठगी के एक फिक्स पैटर्न को उजागर किया है:
फेक आइडेंटिटी: सोशल मीडिया पर आकर्षक प्रोफाइल के जरिए संपर्क।
भरोसा जीतना: शुरुआत में छोटा मुनाफा दिखाकर यूजर का विश्वास हासिल करना।
बड़ा निवेश: लालच में आकर जब व्यक्ति बड़ी रकम लगाता है, तो उसे ‘विड्रॉल एरर’ दिखाया जाता है।
एग्जिट स्कैम: अंत में टैक्स या प्रोसेसिंग फीस के नाम पर और पैसा मांगकर गायब हो जाना।
विशेषज्ञों की राय: लालच पर प्रहार करते अपराधी
साइबर विशेषज्ञों का मानना है कि यह केवल तकनीकी अपराध नहीं, बल्कि एक मानसिक हमला है। ‘जल्द अमीर बनने की चाहत’ और ‘भीड़ मानसिकता’ (सब कमा रहे हैं, मैं क्यों नहीं?) का फायदा उठाकर ठग तकनीक से ज्यादा मानव व्यवहार को निशाना बना रहे हैं। म्यूल अकाउंट्स और विदेशी सर्वरों के इस्तेमाल के कारण इन अपराधियों तक पहुंचना पुलिस के लिए भी बड़ी चुनौती बना हुआ है।
सतर्कता ही सुरक्षा है: निवेश हमेशा SEBI द्वारा मान्यता प्राप्त प्लेटफॉर्म पर ही करें। किसी अनजान व्यक्ति के स्क्रीनशॉट पर भरोसा न करें और संदेह होने पर तुरंत 1930 हेल्पलाइन नंबर पर शिकायत दर्ज कराएं।


