आगरा। आगरा साइबर क्राइम पुलिस ने एक ऐसे अंतरराज्यीय साइबर गिरोह का पर्दाफाश किया है, जिसके तार न केवल देश के विभिन्न राज्यों, बल्कि दुबई तक जुड़े हुए हैं। फर्जी कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) की आड़ में करोड़ों की ठगी करने वाले इस गिरोह के दो शातिर सदस्यों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। शुरुआती जांच में आगरा में ही 10 से 12 करोड़ रुपये और देशभर में कुल 50 करोड़ रुपये से अधिक की धोखाधड़ी का खुलासा हुआ है।
फर्जी आईडी और लिंक से बिछाते थे जाल
डीसीपी वेस्ट एवं साइबर आदित्य कुमार के अनुसार, गिरोह का भंडाफोड़ तब हुआ जब एक स्थानीय निवासी ने शिकायत दर्ज कराई कि उसकी आईडी का उपयोग अवैध रूप से CSC सेंटर चलाने के लिए किया जा रहा है। पीड़ित को इस धोखाधड़ी का पता तब चला जब दूसरे राज्य की पुलिस से उसे नोटिस प्राप्त हुआ।
आरोपियों का कार्य करने का तरीका (Modus Operandi) बेहद आधुनिक था। वे फर्जी CSC पोर्टल, संदिग्ध लिंक और APK फाइलें बनाकर लोगों को सरकारी योजनाओं का झांसा देते थे। फाइल डाउनलोड करते ही पीड़ितों का संवेदनशील डेटा, बैंकिंग क्रेडेंशियल्स और निजी दस्तावेज गिरोह के पास पहुंच जाते थे, जिसके जरिए वे खातों से रकम उड़ा लेते थे।
दुबई तक जुड़े हैं गिरोह के तार
पुलिस की पूछताछ में गिरफ्तार आरोपियों की पहचान सिद्धार्थनगर के आयुष कुमार और उत्तराखंड के उधम सिंह नगर निवासी राजा उर्फ गुल प्रेम कुमार के रूप में हुई है। जांच के दौरान साइबर सेल को करीब एक करोड़ रुपये के संदिग्ध वॉलेट ट्रांजैक्शन के डिजिटल साक्ष्य मिले हैं। अधिकारियों के मुताबिक, यह नेटवर्क हरियाणा, दिल्ली, उत्तराखंड और दुबई तक फैला हुआ है।
पांच अन्य आरोपियों की तलाश जारी
साइबर क्राइम पुलिस ने इस पूरे नेटवर्क के पांच अन्य सदस्यों की पहचान कर ली है। उनकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस की टीमें लगातार दबिश दे रही हैं। बरामद किए गए डिजिटल उपकरणों और बैंक खातों के फॉरेंसिक ऑडिट के जरिए गिरोह के अन्य सदस्यों और उनके द्वारा लूटी गई पूरी रकम का ब्योरा जुटाया जा रहा है। पुलिस का मानना है कि यह गिरोह लंबे समय से सरकारी सेवाओं के नाम पर आम जनता को चूना लगा रहा था।


