सीएम को बताया ‘कूरियर-मैसेंजर’, अखिलेश यादव ने मंत्रिमंडल विस्तार को कहा ‘समय बिताने का काम’

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लखनऊ: उत्तर प्रदेश में रविवार को योगी सरकार के मंत्रिमंडल का बहुप्रतीक्षित विस्तार संपन्न हुआ। राजभवन में आयोजित एक गरिमामय समारोह में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने 6 नए मंत्रियों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। इस विस्तार में क्षेत्रीय और जातीय समीकरणों को साधने की कोशिश की गई है, साथ ही दो मौजूदा मंत्रियों को प्रमोट कर कैबिनेट का दर्जा दिया गया है।

इन चेहरों को मिली कैबिनेट में जगह:

शपथ लेने वाले प्रमुख नामों में भूपेंद्र सिंह चौधरी, मनोज पांडेय, कृष्णा पासवान, कैलाश सिंह राजपूत, सुरेंद्र दिलेर और हंसराज विश्वकर्मा शामिल हैं। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, इन नियुक्तियों के जरिए भाजपा ने आगामी सांगठनिक और राजनैतिक चुनौतियों के लिए अपनी घेराबंदी मजबूत की है।

अखिलेश यादव का हमला: ‘दिल्ली की पर्ची और लखनऊ की शपथ’

​मंत्रिमंडल विस्तार के तुरंत बाद समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर सिलसिलेवार पोस्ट कर सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि “समय बिताने के लिए करना है कुछ काम”। अखिलेश ने आरोप लगाया कि इस विस्तार में मुख्यमंत्री की अपनी कोई भूमिका नहीं है।

​अखिलेश यादव ने लिखा:

​”उधर से पर्ची आएगी, यहाँ तो सिर्फ़ पढ़ी जाएगी। भाजपा राज में वैसे भी CM का मतलब बस यही रह गया है: Courier-Messenger।”

‘कर्मफल’ और ‘स्वार्थ’ पर दार्शनिक प्रहार

​अखिलेश यादव ने केवल राजनीतिक ही नहीं, बल्कि दार्शनिक अंदाज में भी सरकार को घेरा। उन्होंने ‘कर्मफल-कंसफल’ के सिद्धांत का जिक्र करते हुए कहा कि व्यक्ति बुरा नहीं होता, बल्कि उसका लालच और लोभ उसे दुराचरण की ओर ले जाता है। उन्होंने तंजिया लहजे में कहा कि जनता पूछ रही है कि “फ़िल्म सबसे आगे बैठकर देखेंगे या पीछे?”

​सपा प्रमुख ने मानवता और परमार्थ का संदेश देते हुए कहा कि अपने अंदर की बुराइयों पर अच्छाई की जीत ही महाकाव्यों का संदेश है। उन्होंने नसीहत दी कि गलतियों के प्रायश्चित के लिए अंदर के प्रकाश की जरूरत होती है।