नई दिल्ली। नेटफ्लिक्स की आगामी फिल्म ‘घूसखोर पंडत’ अपने शीर्षक के कारण विवादों के भंवर में फंस गई है। फिल्म के टाइटल को ब्राह्मण समुदाय की प्रतिष्ठा के खिलाफ बताते हुए अधिवक्ता विनीत जिंदल ने दिल्ली हाईकोर्ट में एक रिट याचिका दायर की है। याचिका में फिल्म की रिलीज पर तत्काल प्रभाव से अंतरिम रोक लगाने की गुहार लगाई गई है।
समुदाय की गरिमा और भावनाओं का हवाला
याचिकाकर्ता विनीत जिंदल का तर्क है कि ‘पंडित’ शब्द हिंदू धर्म में विद्वान, पुजारी और आध्यात्मिक गुरु के लिए अत्यंत सम्मानजनक माना जाता है। इस शब्द के साथ ‘घूसखोर’ जैसा अपमानजनक विशेषण जोड़ना न केवल ब्राह्मण समुदाय की भावनाओं को आहत करता है, बल्कि उनकी छवि को भी धूमिल करता है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि यह शीर्षक जानबूझकर सांप्रदायिक रूप से उकसाने वाला और हेट स्पीच की श्रेणी में आने वाला बनाया गया है।
6 फरवरी को सुनवाई का अनुरोध
याचिका में संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत कोर्ट से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की गई है। विनीत जिंदल ने अदालत से अनुरोध किया है कि मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए इसे 6 फरवरी को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाए। उनका कहना है कि यदि यह फिल्म इसी शीर्षक के साथ रिलीज होती है, तो इससे सामाजिक सद्भाव बिगड़ने और सामूहिक मानहानि होने का गंभीर खतरा है।
नेटफ्लिक्स की चुप्पी और बढ़ता विरोध
नेटफ्लिक्स ने फिल्म का प्रचार शुरू कर दिया है, लेकिन अभी तक इस कानूनी चुनौती पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। सोशल मीडिया पर भी इस टाइटल को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। लोग इसे धार्मिक और सांस्कृतिक प्रतीकों के अपमान के रूप में देख रहे हैं। अब सबकी नजरें हाईकोर्ट के रुख पर टिकी हैं कि क्या फिल्म अपनी तय तारीख पर रिलीज हो पाएगी या इसे शीर्षक बदलना होगा।

