अयोध्या: गैस संकट के बीच ‘राम रसोई’ का बड़ा फैसला, चूल्हे और कोयले पर पकेगा राम भक्तों के लिए प्रसाद

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अयोध्या। वैश्विक तनाव और पश्चिम एशिया में जारी अस्थिरता का असर अब राम नगरी अयोध्या की सामुदायिक रसोइयों पर भी दिखने लगा है। एलपीजी (LPG) की संभावित किल्लत को देखते हुए प्रसिद्ध ‘राम रसोई’ ने एक बड़ा कदम उठाया है। श्रद्धालुओं को मिलने वाले निःशुल्क भोजन और प्रसाद में कोई रुकावट न आए, इसके लिए अब आधुनिक गैस चूल्हों की जगह पारंपरिक कोयले, लकड़ी के चूल्हों और इलेक्ट्रिक राइस कुकर का सहारा लिया जा रहा है।

भक्तों की सेवा न रुके, इसलिए बदला तरीका

​राम मंदिर के पास स्थित अमावा मंदिर द्वारा संचालित ‘राम रसोई’ प्रतिदिन हजारों श्रद्धालुओं का पेट भरती है। मंदिर के प्रबंधक पंकज कुमार के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गैस आपूर्ति में आ रही बाधाओं को देखते हुए हमने बैकअप प्लान तैयार कर लिया है। यदि आने वाले समय में एलपीजी सिलेंडर की उपलब्धता और कम होती है, तो लकड़ी, कोयले और बड़े इलेक्ट्रिक कुकरों के जरिए भोजन तैयार किया जाएगा, ताकि सेवा का संकल्प न टूटे।

भंडारे के समय में किया गया बदलाव

गैस की सीमित आपूर्ति के कारण फिलहाल राम रसोई के समय में अस्थाई कटौती की गई है। जो भंडारा पहले सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक चलता था, वह अब सुबह 11:30 से दोपहर 1:00 बजे तक ही संचालित किया जा रहा है। सामान्य दिनों में यहाँ रोजाना 10,000 से 20,000 श्रद्धालु प्रसाद ग्रहण करते हैं।

व्यापार और प्रसाद की दुकानों पर भी असर

​सिर्फ राम रसोई ही नहीं, बल्कि अयोध्या के अन्य रेस्टोरेंट और प्रसाद की दुकानों पर भी इस संकट का असर दिख रहा है। दुकानदारों को कमर्शियल गैस सिलेंडर प्राप्त करने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

सरकार की सख्ती: राशनिंग और नए नियम लागू

​गैस संकट को देखते हुए सरकार ने कड़े कदम उठाए हैं। आवश्यक वस्तु अधिनियम (ECA) और एस्मा (ESMA) के तहत घरेलू आपूर्ति को प्राथमिकता दी जा रही है। सिलेंडरों की कालाबाजारी रोकने के लिए बुकिंग का अंतराल 21 दिन से बढ़ाकर 25 दिन कर दिया गया है।

रिफाइनरियों को पूरी क्षमता से काम करने के निर्देश दिए गए हैं। ​पीएनजी (PNG) और सीएनजी (CNG) की आपूर्ति में भी प्राथमिकता तय की जा रही है। ​प्रशासन का कहना है कि वे आपूर्ति के वैकल्पिक रास्ते तलाश रहे हैं ताकि आने वाले हफ्तों में स्थिति सामान्य हो सके।