दिल्ली हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: शारीरिक संबंध के बाद ‘कुंडली’ के नाम पर शादी से मुकरना अपराध

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नई दिल्ली। शादी का भरोसा देकर शारीरिक संबंध बनाने और बाद में कुंडली न मिलने का हवाला देकर शादी से पीछे हटने के मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने सख्त टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि ऐसे हालात में भारतीय न्याय संहिता की धारा 69 के तहत धोखे से शारीरिक संबंध बनाने का अपराध बनता है।

यह टिप्पणी न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा की एकल पीठ ने एक आरोपी की जमानत याचिका खारिज करते हुए की। आरोपी चार जनवरी से न्यायिक हिरासत में है।

अदालत ने क्या कहा

पीठ ने कहा कि रिकॉर्ड से यह सामने आता है कि आरोपी ने पीड़िता को बार-बार भरोसा दिलाया था कि शादी में कुंडली कोई बाधा नहीं बनेगी। ऐसे में बाद में उसी आधार पर शादी से इनकार करना प्रथम दृष्टया उसके आचरण पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

अदालत ने माना कि इस स्तर पर आरोपी का व्यवहार बीएनएस की धारा 69 के दायरे में आता है, जो धोखे से शारीरिक संबंध बनाने से जुड़ा प्रावधान है।

आरोपी की दलीलें और अदालत का रुख

आरोपी की ओर से कहा गया कि दोनों के बीच संबंध आपसी सहमति से थे और वे पिछले आठ साल से एक-दूसरे को जानते थे। यह भी तर्क दिया गया कि शादी का झूठा वादा कर दुष्कर्म का मामला नहीं बनता।

हालांकि अदालत ने इन दलीलों को जमानत के लिए पर्याप्त नहीं माना। न्यायालय ने कहा कि पीड़िता ने नवंबर 2025 में पहली शिकायत दर्ज कराई थी, जिसे आरोपी और उसके परिवार की ओर से शादी का भरोसा दिए जाने पर वापस ले लिया गया था। बाद में कुंडली न मिलने का कारण बताकर शादी से मना कर दिया गया।

सिर्फ रिश्ते टूटने का मामला नहीं

अदालत ने स्पष्ट किया कि यह सिर्फ संबंध खराब होने का मामला नहीं है। यदि आरोपी को पहले से पता था कि उसके परिवार में कुंडली मिलान को महत्व दिया जाता है, फिर भी उसने लगातार शादी का आश्वासन दिया, तो यह गंभीर पहलू है।

कोर्ट ने यह भी कहा कि अभी तक आरोप पत्र दाखिल नहीं हुआ है, इसलिए इस चरण पर जमानत देने का कोई ठोस आधार नहीं बनता।

इस आदेश के साथ आरोपी की जमानत याचिका खारिज कर दी गई है। मामले की सुनवाई आगे जारी रहेगी।