आप सांसद संजय सिंह का बड़ा आरोप: यूपी में मतदाता सूची से 4.5 करोड़ वोटर ‘गायब’, महिलाओं के साथ हुआ बड़ा खेल

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लखनऊ: आम आदमी पार्टी के दिग्गज नेता और राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने रविवार को उत्तर प्रदेश की राजधानी से सत्तापक्ष के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। मीडिया से मुखातिब होते हुए उन्होंने महिला आरक्षण, यूपी की मतदाता सूची में भारी विसंगतियों और केंद्र सरकार की अंतरराष्ट्रीय कूटनीति पर कड़े प्रहार किए।

सिंह ने स्पष्ट रुख अपनाते हुए कहा कि अगर मौजूदा विधानसभा ढांचे के भीतर महिलाओं को 35 प्रतिशत आरक्षण देने की बात है, तो उनकी पार्टी बिना शर्त समर्थन करेगी। हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि जनगणना के बिना सीटों का परिसीमन (डीलिमिटेशन) करना महिलाओं के विश्वास के साथ सीधे तौर पर खिलवाड़ है।

​सांसद संजय सिंह ने उत्तर प्रदेश की मतदाता सूची में मौजूद ‘लैंगिक अंतर’ (Gender Gap) पर गंभीर आपत्ति जताई। उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि प्रदेश की आबादी में प्रति 100 व्यक्तियों पर 48 महिलाएं हैं, लेकिन जब बात मतदाता सूची की आती है, तो महिलाओं की हिस्सेदारी महज 45 प्रतिशत के आसपास सिमट जाती है।

सिंह ने सवाल उठाया कि आखिर ये करीब 3 प्रतिशत महिला मतदाता लिस्ट से बाहर कैसे हो गईं? उन्होंने आशंका जताई कि क्या यह साजिश के तहत पिछड़ी, दलित और अल्पसंख्यक समुदाय की महिलाओं के वोट काटने का नतीजा है? सरकार को सार्वजनिक करना चाहिए कि किन महिलाओं के नाम लिस्ट से हटाए गए हैं।

लोकतंत्र की सेहत पर चिंता जताते हुए संजय सिंह ने कहा कि आबादी और मतदाता आंकड़ों में यह विसंगति चुनावी निष्पक्षता पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगाती है। उन्होंने इस धारणा को भी खारिज किया कि मतदाता संख्या कम होने से भाजपा को नुकसान हो रहा है।

उन्होंने दावा किया कि असल में नई मतदाता सूचियों का फायदा सत्ताधारी दल को ही मिलने वाला है, जबकि विपक्ष को किनारे लगाने की तैयारी की जा चुकी है।

​वोटर लिस्ट में धांधली का मुद्दा उठाते हुए उन्होंने बताया कि योगी सरकार के दौरान दो अलग-अलग सूचियां तैयार की गईं। नगर निकाय चुनावों के लिए दिसंबर में जो सूची आई, उसमें 17 करोड़ 2 लाख मतदाता थे, लेकिन जनवरी में विधानसभा की सूची आते ही यह आंकड़ा सिमटकर 12 करोड़ 55 लाख रह गया।

सिंह ने कड़क लहजे में पूछा कि मात्र एक महीने में साढ़े चार करोड़ मतदाता कहां विलीन हो गए? उन्होंने इसे ‘बड़ा चुनावी घोटाला’ करार देते हुए कहा कि लखनऊ जैसे शहर में ही 23 प्रतिशत मतदाताओं के नाम काट दिए गए, यानी हर चौथा वोटर फर्जी बता दिया गया, जो पूरी तरह अकल्पनीय है।

​अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की भूमिका पर चर्चा करते हुए संजय सिंह ने प्रधानमंत्री की विदेश नीति को ‘विफल’ बताया। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि आज शांति वार्ता पाकिस्तान जैसा देश कर रहा है, जो आतंकवाद की फैक्ट्री है। उन्होंने इसे प्रधानमंत्री की “ही-ही खी-खी” वाली नीति का परिणाम बताया और कहा कि वैश्विक प्रतिष्ठा कर्मों से बनती है, न कि हंसी-मजाक से। सिंह ने सवाल किया कि अगर हर कदम के लिए अमेरिका की हरी झंडी का इंतजार करना पड़े, तो भारत की संप्रभुता कहां रह जाएगी?

अंत में उन्होंने वैश्विक युद्ध के आर्थिक प्रभावों पर जनता को आगाह किया। उन्होंने कहा कि यदि समुद्री मार्ग बाधित हुए तो तेल और गैस की कीमतें आसमान छुएंगी, जिससे आम आदमी महंगाई की चक्की में पिस जाएगा। उन्होंने कहा कि युद्ध रुकना केवल शांति के लिए नहीं, बल्कि भारत की गरीब जनता और मजदूरों के हित के लिए जरूरी है। शांति प्रयासों की विफलता पर जश्न मनाने वालों को आड़े हाथों लेते हुए उन्होंने कहा कि भारत को अब शांति स्थापना के लिए ठोस पहल करनी चाहिए।