​हार की हताशा, बिगाड़ती है भाषा… ब्रजेश पाठक के ‘दो टके’ वाले बयान पर बरसे अखिलेश यादव

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लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजनीति में बयानों के तीर अब व्यक्तिगत और तीखे होते जा रहे हैं। हाल ही में प्रदेश के डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक और समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव के बीच ‘दरी’ और ‘नेतृत्व’ को लेकर एक बड़ा वाकयुद्ध छिड़ गया है।

ब्रजेश पाठक का तीखा हमला:

डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने अल्पसंख्यक समुदाय को संबोधित करते हुए समाजवादी पार्टी पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने सवालिया लहजे में कहा कि “अब्दुल कब तक समाजवादी पार्टी की दरी बिछाने और हुक्का भरने का काम करेगा?” पाठक ने अल्पसंख्यकों से अपील की कि वे अपना खुद का नेतृत्व खड़ा करें।

उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जिस दिन अल्पसंख्यक समाज अपना नेता चुन लेगा, उस दिन सपा ‘दो टके’ की पार्टी बनकर रह जाएगी और एक पार्षद तक नहीं जिता पाएगी। उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए पूछा कि क्या यह इंसाफ है कि 6 प्रतिशत आबादी वाले लोग 20 प्रतिशत वालों से दरी बिछवाएं? उन्होंने सपा को केवल जाति और धर्म की राजनीति करने वाली पार्टी करार दिया।

​अखिलेश यादव का करारा पलटवार:

ब्रजेश पाठक के इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इसे ‘हार की हताशा’ बताया। अखिलेश ने सोशल मीडिया के जरिए पलटवार करते हुए कहा कि पाठक का बयान उनके खुद के ‘दरी बिछाने’ के अनुभव से निकला है। उन्होंने निशाना साधते हुए कहा कि पाठक पहले कहीं और दरी बिछाते थे और आज जहां हैं, वहां उनकी स्थिति और भी खराब है।

अखिलेश यादव ने सहानुभूति जताते हुए कहा कि डिप्टी सीएम इन दिनों ‘असंतुलित’ चल रहे हैं। उन्होंने पाठक के स्वास्थ्य मंत्रालय पर कटाक्ष करते हुए कहा कि उनका अपना विभाग बीमार पड़ा है और वे भ्रष्टाचार के सिक्के बटोरने में व्यस्त हैं।

अखिलेश ने यह भी आरोप लगाया कि अपने मुखिया की ‘प्रतिशोधकारी कुनीति’ के कारण पाठक ने सनातन और अपने समाज, दोनों से मुंह मोड़ लिया है, जिसके चलते अब उनका ‘मानसिक बहिष्कार’ हो चुका है।

​’दो टके’ वाले बयान पर आक्रोश:

अखिलेश यादव ने अंत में बेहद सख्त लहजे में कहा कि जिस समाज को पाठक “दो टके” का कहकर अपमानित कर रहे हैं, उसी समाज से हारने के बाद पाठक की खुद की क्या कीमत रह गई है? उन्होंने इसे ब्रजेश पाठक की ‘राजनीतिक आत्महत्या’ करार देते हुए कहा कि PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) समाज इस अपमान को भूलेगा नहीं और उन्हें राजनीतिक रूप से ‘नाकाबंद’ कर देगा।