आगरा। ताजनगरी स्थित प्रतिष्ठित केंद्रीय हिंदी संस्थान (Central Hindi Institute) में नौकरी दिलाने का झांसा देकर लाखों रुपये ऐंठने का एक बेहद गंभीर और सनसनीखेज मामला सामने आया है। बच्चों की नौकरी लगवाने के नाम पर करीब ₹6 लाख की कथित ठगी के इस मामले में अदालत (न्यायालय) के कड़े हस्तक्षेप के बाद आगरा की हरीपर्वत पुलिस ने संस्थान के प्रोफेसर एचएस सोलंकी और विमला देवी नामक महिला के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है।
सीजेएम कोर्ट की फटकार के बाद हरीपर्वत थाने में दर्ज हुई FIR
यह पूरी कार्रवाई पीड़ित पक्ष द्वारा पुलिस स्तर पर सुनवाई न होने के बाद अदालत की शरण लेने पर हुई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए आगरा के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) शारीब अली ने हरीपर्वत थाना पुलिस को आरोपियों के खिलाफ तत्काल सुसंगत धाराओं में केस दर्ज कर विस्तृत विवेचना करने के कड़े आदेश दिए। कोर्ट के इस सख्त रुख के बाद पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ कानूनी शिकंजा कसना शुरू कर दिया है।
जान-पहचान का फायदा उठाकर जाल में फंसाया, ₹6 लाख लेकर मुकरे
अदालत में दिए गए प्रार्थना पत्र के अनुसार, शिकायतकर्ता सुरेश चंद्र शर्मा ने आरोप लगाया है कि कुछ समय पूर्व उनका परिचय केंद्रीय हिंदी संस्थान के प्रोफेसर एचएस सोलंकी से कराया गया था। मेल-मिलाप बढ़ने पर प्रोफेसर और सह-आरोपी विमला देवी ने सुरेश चंद्र को अपने झांसे में लिया और दावा किया कि उनकी संस्थान के भीतर ऊंची साठगांठ है, जिससे वे उनके बच्चों की वहां पक्की नौकरी लगवा सकते हैं।
झांसे में आया पीड़ित परिवार: आरोपियों के ऊंचे रसूख और दावों पर भरोसा करके पीड़ित सुरेश चंद्र ने अपने बच्चों के सुनहरे भविष्य की खातिर अलग-अलग किस्तों और समय में कुल ₹6 लाख की भारी-भरकम राशि आरोपियों के सुपुर्द कर दी।
न नौकरी मिली और न ही लौटाए रुपये, मांगने पर दी धमकियां
पीड़ित का आरोप है कि मोटी रकम ऐंठने के बाद आरोपी लंबे समय तक सिर्फ आश्वासन के पुल बांधते रहे और जॉइनिंग लेटर आने का झांसा देते रहे। जब काफी समय बीत जाने के बाद भी न तो बच्चों की नौकरी लगी और न ही कोई आधिकारिक सूचना आई, तो पीड़ित को ठगी का अहसास हुआ।
सुरेश चंद्र ने जब आरोपियों के घर और दफ्तर के चक्कर काटकर अपने रुपये वापस मांगे, तो आरोपियों ने साफ टालमटोल शुरू कर दी और रकम लौटाने से साफ मुकर गए। थक-हारकर पीड़ित ने न्याय के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया।
हरीपर्वत थाना पुलिस के आला अधिकारियों का कहना है कि कोर्ट के आदेश पर प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर ली गई है। मामले से जुड़े सभी बैंक ट्रांजैक्शन और सबूतों की गहराई से जांच की जा रही है, और विवेचना में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर जल्द ही आरोपियों की गिरफ्तारी और अगली दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।


