लखनऊ/गाजीपुर: उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले के करंडा थाना क्षेत्र स्थित कटारिया गांव की घटना ने प्रदेश की राजनीति में तूफान खड़ा कर दिया है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने घोषणा की है कि वे आगामी 29 अप्रैल को स्वयं गांव पहुंचकर पीड़ित परिवार से मुलाकात करेंगे। इससे पूर्व उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए प्रदेश की योगी सरकार पर तीखा हमला बोला।
अखिलेश यादव ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि “बयान बदलवाने से सच्चाई नहीं बदलती” और आरोप लगाया कि सरकार अपनी मशीनरी का उपयोग करके घोर अत्याचार के शिकार गरीब पीड़ितों पर दबाव बना रही है।
सपा प्रमुख ने इस पूरे घटनाक्रम पर सरकार को घेरते हुए पांच प्रमुख सवाल उठाए हैं मामले में एफआईआर दर्ज करने में इतनी देरी क्यों हुई? पीड़ित पक्ष के बयान बार-बार क्यों बदलवाए जा रहे हैं? पहले से ही टूटे हुए पीड़ित परिवार को और अधिक प्रताड़ित क्यों किया जा रहा है? पुलिस पर पथराव करने वाले वास्तविक दोषियों पर कार्रवाई किसने रोकी? पोस्टमार्टम रिपोर्ट के तथ्यों पर उठ रहे सवालों का जवाब क्या है?
अखिलेश यादव ने दावा किया कि कटारिया गांव के हर नागरिक को वास्तविकता पता है और इसे किसी भी सरकारी रिपोर्ट से दबाया नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि सरकार की इन कोशिशों से समाज में भ्रम और गुस्सा बढ़ रहा है, विशेषकर पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक (PDA) समुदाय में इस घटना को लेकर भारी आक्रोश है। उन्होंने इस मामले की तुलना ‘हाथरस कांड’ से करते हुए कहा कि दोनों में गहरी समानता है दोनों ही जगह पीड़ित पक्ष कमजोर वर्ग से है और आरोपी पक्ष रसूखदार है।
घटना की पृष्ठभूमि:
विदित हो कि 15 अप्रैल को कटारिया गांव की रहने वाली रीता विश्वकर्मा का शव गंगा नदी में बरामद हुआ था, जिसकी पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण डूबना बताया गया। पुलिस ने आरोपी हरिओम पांडेय को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।
विवाद तब बढ़ा जब 22 अप्रैल को सपा प्रतिनिधिमंडल के गांव पहुंचने पर ग्रामीणों और कार्यकर्ताओं के बीच हिंसक टकराव हुआ, जिसमें पूर्व मंत्री राम आसरे विश्वकर्मा घायल हो गए। पुलिस ने इस हिंसा के आरोप में सपा के दो विधायकों जैकिशन साहू और वीरेंद्र यादव समेत 200 से अधिक लोगों पर केस दर्ज किया है, जिनमें से 10 की गिरफ्तारी हो चुकी है। अब अखिलेश यादव के दौरे के ऐलान ने इस मामले को पूरी तरह राजनीतिक रंग दे दिया है।

