आगरा: ताजनगरी के चर्चित ट्रांसपोर्टर असगर अली की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत का मामला अब एक हाई-प्रोफाइल मिस्ट्री बनता जा रहा है। घटना के कई दिन बीत जाने के बाद भी सोमवार तक पुलिस ने इस मामले में कोई मुकदमा (FIR) दर्ज नहीं किया है, जिससे परिजनों का धैर्य जवाब दे रहा है। जहाँ एक तरफ परिवार इसे दो महिला जीएसटी (GST) अधिकारियों द्वारा रची गई सुनियोजित हत्या बता रहा है, वहीं पुलिस सीसीटीवी फुटेज के आधार पर इसे महज एक ‘सड़क हादसा’ मानकर जांच आगे बढ़ा रही है।
परिजनों का संगीन आरोप: ‘हादसा नहीं, यह कत्ल है’
मृतक असगर अली के परिजनों ने पुलिस कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका सीधा आरोप है कि दो महिला जीएसटी अधिकारियों के साथ किसी विवाद या दबाव के चलते असगर की हत्या की गई है। परिजनों का कहना है कि पुलिस जानबूझकर मामले को दुर्घटना का रूप देकर असली आरोपियों को बचाने का प्रयास कर रही है। सोमवार को भी एफआईआर दर्ज न होने से आक्रोशित समर्थकों ने निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर दबाव बनाया है।
पुलिस की थ्योरी: जालौन नंबर की ‘कातिल’ कार की तलाश
दूसरी ओर, आगरा पुलिस की शुरुआती जांच का कांटा ‘हिट एंड रन’ (Hit and Run) पर टिका है। पुलिस अधिकारियों का दावा है कि घटनास्थल के आसपास के सीसीटीवी कैमरों की पड़ताल में एक जालौन नंबर की संदिग्ध कार दिखाई दी है, जिसने असगर अली को टक्कर मारी थी। पुलिस अब उस कार और उसके चालक की लोकेशन ट्रेस करने में जुटी है। पुलिस का तर्क है कि प्रथम दृष्टया यह मामला सड़क दुर्घटना का ही प्रतीत होता है।
अनसुलझे सवाल: आखिर सच क्या है?
इस मामले ने शहर के व्यापारिक और राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। कुछ बुनियादी सवाल अब भी हवा में तैर रहे हैं यदि यह महज एक एक्सीडेंट था, तो परिजनों ने सीधे जीएसटी विभाग के अधिकारियों का नाम क्यों लिया?
क्या मौत से ठीक पहले असगर अली का किसी विभाग या अधिकारी से कोई तीखा विवाद या लेन-देन का मामला चल रहा था?
पुलिस हत्या के एंगल पर जांच शुरू करने के लिए औपचारिक शिकायत दर्ज करने में देरी क्यों कर रही है?
आगे क्या?
फिलहाल आगरा पुलिस का कहना है कि वे डिजिटल साक्ष्यों, कॉल डिटेल और चश्मदीदों के बयानों का मिलान कर रहे हैं। जालौन नंबर की कार की बरामदगी इस केस का टर्निंग पॉइंट साबित हो सकती है। यदि कार चालक पकड़ा जाता है और वह किसी साजिश का हिस्सा निकलता है, तो पुलिस को अपनी जांच की दिशा बदलनी पड़ेगी। वहीं, परिजनों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द न्याय नहीं मिला तो वे बड़े आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।

