आगरा। जनपद के किरावली तहसील क्षेत्र में शुक्रवार की रात काल बनकर आई। भीषण तूफान के साथ हुई मूसलाधार बारिश और भारी ओलावृष्टि ने पूरे इलाके को तहस-नहस कर दिया है। कुदरत के इस कहर ने न केवल रबी और जायद की फसलों को मटियामेट कर दिया, बल्कि कई परिवारों के सिर से छत भी छीन ली। इस आपदा में दर्जनों लोग घायल हुए हैं और पशुधन को भी भारी क्षति पहुँची है। अचानक हुए इस विनाश से किसानों की साल भर की मेहनत खेतों में ही सड़ गई है।
मलबे में बदली खुशियां: देवनारी और मई बुजुर्ग में सबसे ज्यादा नुकसान
तूफान की तीव्रता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि गांव देवनारी और मई बुजुर्ग में कई मकान ताश के पत्तों की तरह ढह गए। मई बुजुर्ग में सफीद और आबिद का घर पूरी तरह ध्वस्त हो गया, जिससे परिवार के सात सदस्य गंभीर रूप से घायल हो गए। इसी तरह संजू और मंगल सिंह भी दीवार गिरने की चपेट में आ गए। घायलों को उपचार के लिए भरतपुर और आगरा के अस्पतालों में भर्ती कराया गया है।
तूफान ने न केवल घर गिराए, बल्कि बिजली के खंभों को भी उखाड़ फेंका, जिससे पूरा इलाका अंधेरे में डूबा हुआ है।
फसलों की बर्बादी: अन्नदाता की आंखों में आंसू
खेतों में पककर तैयार खड़ी गेहूं की फसल और कटी हुई गठरियां ओलावृष्टि और पानी के जमाव के कारण पूरी तरह चौपट हो गई हैं। सरसा, अरहेरा, दूरा, डीठवार और सिकरौदा समेत दर्जनों गांवों के किसानों का कहना है कि गेहूं की बालियां अब सड़ने लगी हैं। भूसा उड़ जाने के कारण पशुओं के चारे का भी गंभीर संकट पैदा हो गया है। अकोला ब्लॉक के गांवों में भी तबाही के निशान हर तरफ नजर आ रहे हैं।
सियासी हलचल: मुआवजे के लिए उठी आवाज
तबाही की खबर मिलते ही जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों का दौरा शुरू हो गया। क्षेत्रीय विधायक चौधरी बाबूलाल और उपजिलाधिकारी दिव्या सिंह ने प्रभावित क्षेत्रों का जायजा लिया और किसानों को जल्द मुआवजा दिलाने का भरोसा दिया। वहीं, भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) और राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) ने प्रशासन पर दबाव बनाना शुरू कर दिया है।
रालोद के प्रदेश उपाध्यक्ष कप्तान सिंह चाहर ने जिलाधिकारी को पत्र लिखकर तत्काल सर्वे कराने की मांग की है। वहीं, बागपत सांसद डॉ. राजकुमार सांगवान ने भी मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर आगरा, मथुरा और अलीगढ़ के प्रभावित किसानों के राजस्व देयों को स्थगित करने और विशेष राहत पैकेज देने का अनुरोध किया है।
संकट की घड़ी: अंधेरे और दहशत में ग्रामीण
वर्तमान में स्थिति यह है कि किसान और ग्रामीण दोनों ही दहशत में हैं। बिजली आपूर्ति ठप होने से राहत कार्य में भी बाधा आ रही है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि सरकार ने तत्काल आर्थिक सहायता नहीं दी, तो क्षेत्र में बड़ा आर्थिक संकट खड़ा हो जाएगा। फिलहाल, तहसील प्रशासन नुकसान के आंकलन में जुटा है।

