किरावली (आगरा): आगरा की तहसील किरावली के चाहरवाटी क्षेत्र के लिए आज एक अत्यंत दुखद दिन है। क्षेत्र के गौरव और भारतीय सेना के जांबाज अधिकारी कर्नल दीवान सिंह चाहर अब हमारे बीच नहीं रहे। दिल्ली स्थित अपने निजी आवास पर लंबी बीमारी के बाद 91 वर्ष की आयु में उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर जैसे ही उनके पैतृक गांव ‘बसैरी चाहर’ पहुँची, समूचे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई।
साधारण किसान परिवार से सेना के शिखर तक
7 अक्टूबर 1945 को एक साधारण किसान परिवार में जन्मे दीवान सिंह ने बचपन से ही अभावों को अपनी ताकत बनाया। बसैरी चाहर और जैंगारा से अपनी स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने आगरा से स्नातक की डिग्री हासिल की। देश की मिट्टी का कर्ज उतारने का जज्बा उन्हें सेना की ओर खींच ले गया। 1970 में उन्होंने ‘आर्मी मेडिकल कोर’ के जरिए कमीशन प्राप्त किया और भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट कर्नल के रूप में नियुक्त होकर अपनी सेवाओं का आगाज किया।
भारत-पाक युद्ध के नायक और ‘न्याय के पहरेदार’
कर्नल दीवान सिंह की वीरता का प्रमाण 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान देखने को मिला, जहाँ उन्होंने अदम्य साहस का परिचय दिया। उनकी निष्ठा और बहादुरी के लिए उन्हें कई सैन्य सम्मानों से नवाजा गया। वे केवल एक योद्धा ही नहीं, बल्कि एक प्रखर कानूनविद भी थे। सेना में रहते हुए उन्होंने एलएलबी की पढ़ाई की और अनुशासन के प्रति इतने सख्त थे कि अपने कार्यकाल के दौरान 44 सैनिकों के ‘कोर्ट मार्शल’ की कानूनी प्रक्रिया का निष्पक्ष संचालन किया।
रिटायरमेंट के बाद भी समाज को समर्पित
सेवानिवृत्ति के बाद कर्नल साहब घर पर शांत नहीं बैठे। वर्ष 2004 में उन्होंने आगरा जाट महासभा के अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी संभाली और समाज के उत्थान के लिए कई यादगार कार्य किए। उनके परिवार की विरासत को उनके पुत्र रविदीप सिंह चाहर बखूबी आगे बढ़ा रहे हैं, जो 2019 से ऑल इंडिया सर्विसेज (IAS/IPS श्रेणी) में वरिष्ठ अधिकारी के पद पर कार्यरत हैं।
नेताओं और गणमान्य जनों ने दी विदाई
उनके निधन पर सांसद राजकुमार चाहर, पूर्व सैनिक जगदीश सोलंकी, भाजपा नेता यशपाल चौधरी, वरिष्ठ अधिवक्ता मुनेश चंद लवानियां समेत आगरा और किरावली क्षेत्र के अनगिनत राजनीतिक व सामाजिक दिग्गजों ने शोक व्यक्त किया है। सभी ने एक स्वर में कहा कि कर्नल साहब का जाना चाहरवाटी के लिए एक अपूरणीय क्षति है। उनका अनुशासित जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणास्रोत रहेगा।

