आगरा कैंट मारपीट मामला: डीएसएस नरेंद्र चाहर के समर्थन में उतरी अखिल भारतीय जाट महासभा, आरपीएफ जवानों की बर्खास्तगी की मांग

स्थानीय समाचार

आगरा। आगरा कैंट रेलवे स्टेशन पर डिप्टी स्टेशन सुपरिटेंडेंट (डीएसएस) नरेंद्र सिंह चाहर के साथ आरपीएफ जवानों द्वारा की गई कथित मारपीट का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। रेलवे कर्मचारी संगठनों के बाद अब अखिल भारतीय जाट महासभा ने भी इस पूरे प्रकरण में मोर्चा खोल दिया है।

महासभा ने न केवल इस घटना की कड़े शब्दों में निंदा की है, बल्कि आरोपी आरपीएफ जवानों को तत्काल प्रभाव से सेवा से बर्खास्त करने और उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की है। साथ ही, संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि रेलवे प्रशासन ने ढुलमुल रवैया अपनाया, तो इस मुद्दे को लेकर एक व्यापक जनआंदोलन शुरू किया जाएगा।

घटना के बाद, अखिल भारतीय जाट महासभा का एक प्रतिनिधिमंडल डीएसएस नरेंद्र सिंह चाहर के निवास स्थान पर पहुंचा। वहां उन्होंने श्री चाहर और उनके परिवारजनों से भेंट की और उन्हें संगठन की ओर से पूर्ण समर्थन और एकजुटता का भरोसा दिलाया। प्रतिनिधिमंडल ने स्पष्ट किया कि जब तक पीड़ित अधिकारी को न्याय नहीं मिल जाता, तब तक महासभा उनके साथ मजबूती से खड़ी रहेगी और इस संघर्ष को जारी रखेगी।

इस मामले पर महासभा के पदाधिकारियों ने एक संयुक्त बयान जारी करते हुए कहा कि रविवार को ड्यूटी के दौरान डीएसएस नरेंद्र सिंह चाहर के साथ आरपीएफ जवानों का व्यवहार न केवल अशोभनीय है, बल्कि यह पूरी तरह से अस्वीकार्य और सरकारी सेवा की गरिमा को धूमिल करने वाला है। महासभा का साफ कहना है कि जो सुरक्षाकर्मी सेवा की मर्यादा को तार-तार कर रहे हैं, उन्हें पद पर बने रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।

संयुक्त बयान जारी करने वालों में जिला अध्यक्ष कप्तान सिंह चाहर, महानगर अध्यक्ष गजेंद्र सिंह नरवार, भाजपा के वरिष्ठ नेता मोहन सिंह चाहर, महिला प्रकोष्ठ की जिलाध्यक्ष श्रीमती निर्मल चाहर, श्रीमती ममता चौधरी, सुभाष प्रधान, लालू भैय्या तथा महानगर मंत्री सोनवीर सोलंकी जैसे प्रमुख पदाधिकारी शामिल थे। इन सभी नेताओं ने एक स्वर में मांग की है कि दोषी जवानों को अविलंब बर्खास्त कर कानून के दायरे में लाया जाए।

महासभा ने रेलवे कर्मचारी संगठनों की मांगों का पुरजोर समर्थन करते हुए कहा कि वे दोषियों की गिरफ्तारी और उनकी बर्खास्तगी के लिए चलाए जा रहे विरोध का पूरी तरह साथ देते हैं। महासभा के नेताओं ने कहा कि प्रशासन को इस मामले में निष्पक्ष और कठोर कदम उठाने होंगे, ताकि भविष्य में रेलवे के भीतर ऐसी अराजक घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो और कर्मचारियों का मनोबल सुरक्षित रहे।