आगरा। तकनीक, सोशल मीडिया और तेजी से बदलते वैश्विक सांस्कृतिक परिवेश के बीच नई पीढ़ी (जेन-जी) के सामने खड़ी मानसिक, सामाजिक और भावनात्मक चुनौतियों को देखते हुए अब स्कूलों की जिम्मेदारी भी बढ़ गई है। विद्यार्थियों को केवल किताबी ज्ञान देने तक सीमित न रहकर, अब उन्हें एक संतुलित और जिम्मेदार व्यक्तित्व प्रदान करना समय की प्रमुख आवश्यकता बन गई है। इसी दृष्टिकोण को सार्थक करने के उद्देश्य से सेंट पैट्रिक्स जूनियर हाई स्कूल में शिक्षकों के लिए एक विशेष ‘व्यक्तित्व एवं व्यवहार विकास कार्यशाला’ का आयोजन किया गया।
बदलते सामाजिक परिवेश की चुनौतियां
कार्यशाला में प्रसिद्ध बिहेवियर साइंटिस्ट डॉ. नवीन गुप्ता ने बताया कि आधुनिकता की अंधी दौड़, बढ़ता मानसिक तनाव, अत्यधिक प्रतिस्पर्धा और अकेलेपन के कारण किशोरों का भावनात्मक संतुलन प्रभावित हो रहा है। उन्होंने समाज में घटी हालिया चर्चित घटनाओं का उदाहरण देते हुए कहा कि सांस्कृतिक परिवर्तन के साथ युवाओं को सही दिशा और नैतिक मूल्यों का आधार देना समाज और शिक्षण संस्थानों की साझा जिम्मेदारी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि विदेशों की तरह भारत में भी यदि मानसिक असंतुलन और बढ़ते तनाव को नियंत्रित करना है, तो स्कूलों को ‘मार्गदर्शक’ और ‘भावनात्मक सहयोगी’ की भूमिका में आना होगा।
व्यक्तित्व विश्लेषण के लिए ‘डिस्कवरी ऑफ सेल्फ’ का महत्व
डॉ. नवीन गुप्ता ने कार्यशाला के दौरान अपने द्वारा विकसित विशेष व्यक्तित्व विश्लेषण टूल ‘डिस्कवरी ऑफ सेल्फ’ (DOS) के बारे में विस्तार से समझाया। उन्होंने कहा कि यह टूल शिक्षकों को न केवल स्वयं को, बल्कि अपने विद्यार्थियों, सहकर्मियों और वरिष्ठों के व्यक्तित्व को गहराई से समझने में सक्षम बनाता है। उन्होंने बताया कि अधिकांश मानवीय और वैवाहिक विवाद केवल स्वभाव और व्यक्तित्व की गलत समझ के कारण होते हैं, जिन्हें सही संवाद और परस्पर समझ से हल किया जा सकता है।
शिक्षण जगत में बदलाव की जरूरत
डॉ. गुप्ता के अनुसार, यदि देश के सभी विद्यालय व्यक्तित्व विकास, व्यवहार प्रशिक्षण और मानसिक स्वास्थ्य को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाएं, तो समाज में बढ़ते वैचारिक मतभेद और सामाजिक असंतुलन को काफी हद तक कम किया जा सकता है। उन्होंने जोर दिया कि आज की सबसे बड़ी जरूरत सफल करियर के साथ-साथ एक संवेदनशील, संतुलित और जिम्मेदार इंसान का निर्माण करना है।
विद्यालय प्रबंधन का प्रयास
30 जून को आयोजित इस चार घंटे की गहन कार्यशाला को सफल बनाने में विद्यालय की सिस्टर लीना और सिस्टर एलिस की विशेष भूमिका रही। सभी शिक्षकों ने इस प्रशिक्षण सत्र को अत्यंत व्यावहारिक और वर्तमान दौर की बड़ी जरूरत बताते हुए सराहा। विद्यालय प्रबंधन ने संकल्प लिया कि वे भविष्य में भी अपने छात्रों के सर्वांगीण विकास हेतु ऐसे नवाचारी कार्यक्रमों को प्राथमिकता देते रहेंगे।


