पेठा-दालमोठ के बाद अब बेडई का होगा जलवा: आगरा में कार्यशाला के दौरान पैकेजिंग तकनीक और निर्यात पर हुआ मंथन

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आगरा। आगरा की प्रसिद्ध बेडई को ‘एक जनपद एक व्यंजन’ (ओडीओसी) योजना में शामिल कराने और शहर को पैकेजिंग हब के रूप में विकसित करने की मांग अब जोर पकड़ने लगी है। चैम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज ने उद्योग विभाग के अधिकारियों के समक्ष इन दोनों मांगों को प्रमुखता से उठाया। उद्योग विभाग ने बेडई को ओडीओसी में शामिल करने का प्रस्ताव जल्द शासन को भेजने का आश्वासन दिया। वहीं कार्यशाला में विशेषज्ञों ने स्थानीय व्यंजनों को वैज्ञानिक, आकर्षक और निर्यात योग्य पैकेजिंग के माध्यम से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहचान दिलाने पर विस्तार से जानकारी दी।

चैम्बर सभागार में चैम्बर अध्यक्ष मनोज कुमार बंसल की अध्यक्षता में जिला उद्योग केन्द्र द्वारा ‘एक जनपद एक व्यंजन (ओडीओसी)’ विषय पर कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में उपायुक्त उद्योग शैलेन्द्र कुमार, भारतीय पैकेजिंग संस्थान (आईआईपी), लखनऊ से आए प्रोफेसर अंशुमन श्रीवास्तव, तकनीकी विशेषज्ञ श्रद्धानंद राय, जिला उद्योग केन्द्र के असिस्टेंट कमिश्नर-1 हुक्म चंद दिनकर तथा राजेश कुमार सहित बड़ी संख्या में उद्यमी एवं व्यापारी उपस्थित रहे।

बेडई को ओडीओसी में शामिल करने की जोरदार मांग

चैम्बर अध्यक्ष मनोज कुमार बंसल ने कहा कि आगरा की पहचान केवल पेठा ही नहीं, बल्कि बेडई भी है। उन्होंने बताया कि बेडई को ओडीओसी में शामिल करने के लिए चैम्बर की ओर से शासन को पत्र भेजा जा चुका है।

इस पर उपायुक्त उद्योग शैलेन्द्र कुमार ने भरोसा दिलाया कि आगरा की बेडई को ओडीओसी में शामिल करने का प्रस्ताव शीघ्र ही शासन को भेजा जाएगा।

आगरा को पैकेजिंग हब बनाने की मांग

चैम्बर ने कार्यशाला के दौरान आगरा को पैकेजिंग हब के रूप में विकसित करने की मांग भी उठाई। चैम्बर का कहना था कि इससे गैर-प्रदूषणकारी उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा, नए रोजगार सृजित होंगे और स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेहतर पहचान मिल सकेगी।

वैज्ञानिक पैकेजिंग से बढ़ेगी वैश्विक पहचान

प्रो. अंशुमन श्रीवास्तव ने कहा कि कार्यशाला का उद्देश्य पेठा, दालमोठ, गजक और पराठा जैसे आगरा के प्रसिद्ध ओडीओसी उत्पादों को वैज्ञानिक एवं आकर्षक पैकेजिंग के माध्यम से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार के लिए तैयार करना है। उन्होंने कहा कि बेहतर पैकेजिंग, ब्रांडिंग, लेबलिंग और गुणवत्ता मानकों के अनुरूप उत्पाद विकसित करने से स्थानीय उद्यमियों और कारीगरों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

उन्होंने बताया कि भारतीय पैकेजिंग संस्थान की स्थापना 14 मई 1966 को वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय, भारत सरकार के अंतर्गत सोसायटी पंजीकरण अधिनियम-1860 के तहत की गई थी। संस्थान पैकेजिंग शिक्षा, अनुसंधान, उत्पाद परीक्षण, प्रशिक्षण, प्रमाणन, परामर्श और नवाचार के क्षेत्र में कार्य कर रहा है तथा एमएसएमई और निर्यात प्रोत्साहन विभाग के सहयोग से उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

पैकेजिंग के आधुनिक मानकों की दी जानकारी

कार्यशाला में डॉ. अंशुमन श्रीवास्तव ने प्रतिभागियों को पैकेजिंग मानकों, लीगल मेट्रोलॉजी, फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स, खाद्य पैकेजिंग सामग्री के चयन, स्वच्छता, लेबलिंग, क्यूआर कोड, ट्रेसबिलिटी और गुणवत्ता नियंत्रण से संबंधित विस्तृत जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि क्यूआर कोड, बारकोड और न्यूट्रिशन लेबलिंग के माध्यम से उपभोक्ता उत्पाद की निर्माण तिथि, बैच संख्या, पोषण संबंधी जानकारी और निर्माता का विवरण आसानी से प्राप्त कर सकता है। इससे उपभोक्ता का विश्वास बढ़ता है और निर्यात प्रक्रिया भी आसान होती है।

आधुनिक मशीनों का भी हुआ प्रदर्शन

असिस्टेंट कमिश्नर-1 हुक्म चंद दिनकर ने बताया कि प्रतिभागियों को आधुनिक पैकेजिंग मशीनों जैसे वैक्यूम पैकेजिंग मशीन, इंडक्शन सीलिंग मशीन, इंकजेट प्रिंटर और मैनुअल बैच कोड प्रिंटर के संचालन और उपयोग की जानकारी भी दी गई। उन्होंने कहा कि इन तकनीकों से उत्पादों की शेल्फ लाइफ बढ़ती है तथा गुणवत्ता और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित होती है।

उद्यमियों को मिलेगा बड़ा लाभ

चैम्बर के पूर्व अध्यक्ष मनीष अग्रवाल ने कहा कि कार्यक्रम में पेठा, दालमोठ, गजक और पराठा से जुड़े उद्यमियों, कारीगरों और स्वयं सहायता समूहों के सदस्यों ने आधुनिक पैकेजिंग तकनीकों में विशेष रुचि दिखाई। ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों से उत्पादों की गुणवत्ता, ब्रांड वैल्यू, विपणन क्षमता और निर्यात की संभावनाओं में वृद्धि होगी।

बैठक में ये रहे मौजूद

कार्यक्रम में चैम्बर अध्यक्ष मनोज कुमार बंसल, उपायुक्त उद्योग शैलेन्द्र कुमार, प्रो. अंशुमन श्रीवास्तव, श्रद्धानंद राय, हुक्म चंद दिनकर, राजेश कुमार, उपाध्यक्ष नितेश अग्रवाल, पूर्व अध्यक्ष राजकुमार अग्रवाल, सीताराम अग्रवाल, मनीष अग्रवाल, अतुल कुमार गुप्ता, राजकुमार, भगत, तुषार गुप्ता, अनिल कुमार गुप्ता, रोहित अग्रवाल, रजत सिंघल, राजेश अग्रवाल, गौरव गोयल, कुलदीप कोहली और देवेन्द्र गोयल सहित बड़ी संख्या में उद्यमी एवं व्यापारी उपस्थित रहे।