आगरा में संपत्ति विवाद में गजब की साजिश: मौत के एक महीने बाद ‘मारपीट’ करने कैसे आया ओमप्रकाश? फर्जी मुकदमे की पोल खुली तो बहन पर दर्ज हुई FIR

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आगरा: ताजनगरी के थाना हरीपर्वत क्षेत्र में संपत्ति विवाद में विपक्षी को फंसाने के लिए रची गई एक ऐसी साजिश सामने आई है, जिसने पुलिस और कानून के जानकारों को भी हैरान कर दिया है। राकेश कुमार कुशवाह की शिकायत पर पुलिस ने उनकी सगी बहन हेमलता कुशवाह और अन्य सहयोगियों के खिलाफ जालसाजी और साजिश का मुकदमा दर्ज किया है।

​संपत्ति विवाद और ‘काल्पनिक’ मारपीट

पीड़ित राकेश कुमार के अनुसार, अपनी बहन हेमलता के साथ उनका संपत्ति को लेकर पुराना विवाद चल रहा है। आरोप है कि बहन और उसके साथी राकेश पर पुराने मामलों में समझौते के लिए दबाव बना रहे थे। जब राकेश ने 25 हजार रुपये के ‘सेटलमेंट’ और समझौते से इनकार कर दिया, तो उन्हें झूठे मुकदमे में फंसाने की साजिश रची गई।

​अदालत में पेश की गई झूठी कहानी

साजिश के तहत 3 मई 2025 की एक कथित मारपीट की घटना दिखाकर अदालत में प्रार्थना पत्र दाखिल किया गया। इस प्रार्थना पत्र में राकेश और उनके साथियों पर गंभीर आरोप लगाए गए। लेकिन, इस कहानी को बुनने में आरोपियों से एक ऐसी बड़ी चूक हो गई, जिसने पूरी पोल खोल दी।

मुर्दा बना ‘हमलावर’: यहीं पकड़ी गई चोरी

राकेश कुमार ने पुलिस को दिए सबूतों में बताया कि जिस ओमप्रकाश कुशवाह को इस कथित घटना (3 मई) में आरोपी दिखाया गया है, उनकी मृत्यु 8 अप्रैल 2025 को ही हो चुकी थी। यानी जिस व्यक्ति का डेथ सर्टिफिकेट अप्रैल का है, उसे मई में हुई मारपीट का आरोपी बना दिया गया। मृत व्यक्ति को आरोपी बनाना इस पूरी साजिश का सबसे बड़ा और अकाट्य प्रमाण बन गया है।

पुलिस की कार्रवाई: हर एंगल से जांच

पुलिस ने मामले की गंभीरता और दस्तावेजों की प्राथमिक जांच के बाद संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है। अधिकारियों का कहना है कि मृत व्यक्ति के नाम का उपयोग कर अदालत को गुमराह करने और फर्जी साक्ष्य गढ़ने के मामले में दोषियों के खिलाफ कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। पुलिस अब उन लोगों की भी तलाश कर रही है जिन्होंने इस फर्जी प्रार्थना पत्र को तैयार करने में कानूनी मदद दी थी।