सावधान! पेंशनरों को ‘डिजिटल अरेस्ट’ कर रहे हैं साइबर ठग: आगरा की शिक्षिका से 32 लाख की ठगी, मुख्य कोषाधिकारी ने जारी किया अलर्ट

स्थानीय समाचार

आगरा: ताजनगरी में साइबर अपराधियों ने अब बुजुर्गों और पेंशनरों को अपना नया निशाना बनाना शुरू कर दिया है। ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर डरा-धमकाकर लाखों रुपये ऐंठने वाले गिरोह शहर में सक्रिय हैं। हाल ही में आगरा की एक महिला शिक्षिका से ठगों ने भय दिखाकर उनके खाते से 32 लाख रुपये पार कर दिए। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए मुख्य कोषाधिकारी और बैंक अधिकारियों ने जिले के सभी पेंशनरों के लिए आपातकालीन दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

धमकी से न डरें, लालच में न आएं

मुख्य कोषाधिकारी रीता सचान ने जानकारी देते हुए बताया कि साइबर अपराधी पेंशनरों को फोन कर उन्हें किसी फर्जी केस में फंसाने की धमकी देते हैं और फिर ‘डिजिटल अरेस्ट’ का नाटक रचकर उनसे पैसे ट्रांसफर करवा लेते हैं। उन्होंने सभी पेंशनरों से अपील की है कि वे किसी भी अनजान कॉल को न उठाएं। यदि कोई व्यक्ति पुलिस या अधिकारी बनकर डराए, तो घबराने के बजाय तुरंत अपने परिवार के सदस्यों और स्थानीय पुलिस को सूचित करें।

क्या है ‘डिजिटल अरेस्ट’ का मायाजाल?

लीड बैंक (केनरा बैंक) के मैनेजर ऋषिकेश बनर्जी ने बताया कि यह एक सोची-समझी साजिश है। ठग खुद को CBI, पुलिस, कस्टम या RBI का अधिकारी बताकर व्हाट्सएप या स्काइप पर वीडियो कॉल करते हैं। वे शिकार को बताते हैं कि उनके आधार कार्ड का इस्तेमाल ड्रग्स तस्करी, मनी लॉन्ड्रिंग या अवैध पार्सल भेजने में हुआ है। इसके बाद पीड़ित को एक कमरे में अकेले रहने और जांच पूरी होने तक वीडियो कॉल चालू रखने के लिए मजबूर किया जाता है, जिसे वे ‘डिजिटल अरेस्ट’ कहते हैं। अंत में गिरफ्तारी से बचने के नाम पर UPI या बैंक ट्रांसफर के जरिए मोटी रकम की मांग की जाती है।

RBI की दोटूक: वीडियो कॉल पर नहीं होती गिरफ्तारी

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने स्पष्ट किया है कि कानून प्रवर्तन करने वाली कोई भी एजेंसी (पुलिस या जांच एजेंसियां) कभी भी वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी नहीं करती है। ऐसी कोई कानूनी प्रक्रिया अस्तित्व में नहीं है। सरकार ने भी अंतरराष्ट्रीय स्पूफ कॉल्स (जो भारतीय नंबर की तरह दिखती हैं) को रोकने के लिए ‘एंटी-स्पूफिंग’ उपाय शुरू किए हैं, लेकिन व्यक्तिगत सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है।

ठगी से बचने के लिए क्या करें? (सुरक्षा मंत्र)

​घबराएं नहीं: याद रखें, यह पूरी तरह से धोखाधड़ी है। कोई भी असली अधिकारी वीडियो कॉल पर पैसे नहीं मांगता।

​कॉल तुरंत काटें: जैसे ही आपको संदेह हो, वीडियो कॉल बंद कर दें।

​गोपनीयता बनाए रखें: अपना बैंक विवरण, पिन, ओटीपी या व्यक्तिगत जानकारी किसी को न दें।

​परिवार को बताएं: अकेले कमरे में बंद होने के बजाय तुरंत परिजनों को सूचित करें।

​शिकायत कहाँ करें?

​यदि आप या आपके आसपास कोई इस धोखाधड़ी का शिकार होता है, तो बिना देरी किए निम्नलिखित माध्यमों पर रिपोर्ट करें:

​हेल्पलाइन नंबर: 1930 पर कॉल करें।

​साइबर पोर्टल: www.cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें।