नई दिल्ली। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सोशल मीडिया के माध्यम से केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोला है। देश में गहराते एलपीजी (LPG) गैस संकट और बढ़ती कीमतों को लेकर राहुल गांधी ने सरकार की तुलना कोविड-19 काल के कुप्रबंधन से की है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की ‘नीति शून्यता’ और ‘अहंकार’ के कारण आज गरीब मजदूर एक बार फिर पलायन को मजबूर हो रहा है।
कोविड जैसी ‘नीति शून्य’ कार्यप्रणाली: राहुल गांधी
राहुल गांधी ने अपने पोस्ट में लिखा कि प्रधानमंत्री ने वादा किया था कि वे गैस संकट को कोविड की तरह हैंडल करेंगे, और उन्होंने सच में वैसा ही किया। राहुल के अनुसार, “बिल्कुल कोविड के जैसे ही नीति शून्य, घोषणा बड़ी और बोझ सिर्फ गरीबों पर।” उन्होंने कहा कि ₹500-800 की दिहाड़ी कमाने वाले प्रवासी मजदूरों के लिए अब रसोई गैस पहुंच से बाहर हो गई है।
मजदूरों का पलायन और उद्योगों की बदहाली
कांग्रेस नेता ने जमीनी हकीकत बयां करते हुए कहा कि दिनभर मेहनत कर रात को घर लौटने वाले मजदूर के पास अब चूल्हा जलाने तक के पैसे नहीं बचे हैं। इसका नतीजा यह हो रहा है कि मजदूर फिर से ‘शहर छोड़ो, गाँव भागो’ की राह पर चल पड़ा है। उन्होंने चिंता जताई कि जो मजदूर टेक्सटाइल मिल्स और फैक्ट्रियों की रीढ़ हैं, आज वही टूट रहे हैं। राहुल गांधी के मुताबिक, “टेक्सटाइल सेक्टर पहले से ही ICU में है और मैन्युफैक्चरिंग दम तोड़ रही है।”
कूटनीतिक चूक और अहंकार का आरोप
राहुल गांधी ने इस संकट के मूल कारण पर सवाल उठाते हुए इसे सरकार की कूटनीतिक विफलता बताया। उन्होंने कहा, “यह संकट उस कूटनीतिक मेज पर हुई चूक से आया है, जिसे सरकार आज तक स्वीकार नहीं करती। जब अहंकार ही नीति बन जाए, तो अर्थव्यवस्था चरमराती है, उद्योग बर्बाद होते हैं और देश दशकों पीछे धकेल दिया जाता है।”
”चुप मत रहो, यह सबका सवाल है”
अंत में राहुल गांधी ने जनता से अपील की कि वे इस मुद्दे पर अपनी आवाज उठाएं। उन्होंने सवाल किया, “हर संकट में सबसे पहले गरीब ही क्यों मरता है? चुप मत रहो। यह सिर्फ गरीब का नहीं, हम सबका सवाल है।”
राहुल गांधी के इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। विपक्ष लगातार गैस की आपूर्ति और बढ़ती महंगाई को लेकर सरकार को घेरने की रणनीति बना रहा है।

