आगरा। ताजनगरी की जीवनरेखा कही जाने वाली यमुना नदी के अस्तित्व को बचाने और उसकी निर्मलता वापस लाने के लिए सोमवार को कला और पर्यावरण चेतना का एक अद्भुत संगम देखने को मिला। ‘रिवर कनेक्ट कैंपेन’ के वार्षिक सांस्कृतिक जलसे में शहर के दिग्गज कलाकारों और पर्यावरणविदों ने नृत्य, संगीत और स्वर के माध्यम से यमुना शुद्धिकरण की पुरजोर मांग उठाई।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने मोहा मन
नृत्य ज्योति कथक केंद्र के प्रांगण में आयोजित इस भव्य कार्यक्रम का संचालन डॉ. ज्योति खंडेलवाल के कुशल निर्देशन में हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ श्री गणेश वंदना और भावपूर्ण ‘यमुना स्तुति’ से हुआ। बाल कलाकारों ने ओडिसी नृत्य और “प्रकृति का स्वागत” जैसी प्रस्तुतियों के जरिए यह संदेश दिया कि यदि प्रकृति सुरक्षित है, तभी मानव सभ्यता का भविष्य सुरक्षित है। लगभग दो घंटे तक चले इस जलसे ने दर्शकों को अंत तक बांधे रखा।
12 साल का संघर्ष और सरकार से अपील
रिवर कनेक्ट कैंपेन के सूत्रधार बृज खंडेलवाल ने मंच से सरकार और प्रशासन को चेतावनी भरे लहजे में आगाह किया। उन्होंने कहा कि आगरा की जीवनरेखा दम तोड़ रही है और अब समय आ गया है कि कागजी घोड़ों के बजाय धरातल पर ठोस कदम उठाए जाएं। वहीं, यमुना आरती से जुड़े महंत पंडित जुगल किशोर ने बताया कि पिछले 12 वर्षों से नियमित आरती के माध्यम से जनमानस को नदी से जोड़ने का अभियान निरंतर जारी है, जिसका असर अब लोगों की संवेदनशीलता में दिखने लगा है।
भविष्य की रणनीति पर चर्चा
अभियान से जुड़े राहुल नंदवंशी, दीपक राजपूत, और पद्मिनी अय्यर ने यमुना संरक्षण की आगामी योजनाओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन तब तक नहीं थमेगा जब तक यमुना अपने पुराने स्वरूप में वापस नहीं आ जाती। कार्यक्रम में डॉ. महेश धाकड़, देव प्रकाश शर्मा और विशाल झा सहित शहर के कई संगीत प्रेमी और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
अंत में डॉ. ज्योति खंडेलवाल ने सभी कलाकारों और अतिथियों का आभार व्यक्त करते हुए इस संकल्प के साथ कार्यक्रम का समापन किया कि कला केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का सबसे सशक्त माध्यम है।

