नई दिल्ली। लोकसभा में स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष द्वारा लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान सदन का माहौल बेहद गर्म रहा। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने चर्चा का जवाब देते हुए नेता प्रतिपक्ष (LOP) राहुल गांधी की सदन में अनुपस्थिति और उनके ‘अटेंडेंस रिकॉर्ड’ को लेकर सीधा हमला बोला। शाह ने तंज कसते हुए कहा कि जब संसद में महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा होती है, तब कांग्रेस के बड़े नेता विदेश यात्रा पर होते हैं और बाद में ‘माइक बंद’ करने का आरोप लगाते हैं।
आंकड़ों के जरिए घेरा: “वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की सुविधा नहीं है”
अमित शाह ने सदन में राहुल गांधी की पिछली तीन लोकसभाओं की मौजूदगी के आंकड़े पेश करते हुए उन्हें कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने कहा 17वीं लोकसभा में राहुल की उपस्थिति 51% रही, जबकि राष्ट्रीय औसत 66-67% है।
16वीं लोकसभा में उनकी उपस्थिति 52% थी, जबकि सदन का औसत 80% था। 15वीं लोकसभा में वह केवल 43% समय मौजूद रहे, जबकि औसत 76% था।
शाह ने तंज कसा, “जब सत्र चलता है, तो विदेश यात्रा लग जाती है। जो व्यक्ति जर्मनी में बैठा है, वह यहां कैसे बोलेगा? यहां वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की सुविधा तो है नहीं।”
विपक्ष का भारी हंगामा और आसन की रूलिंग
शाह के भाषण के दौरान कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल ने आपत्ति जताते हुए पूछा कि बहस स्पीकर के खिलाफ है या नेता प्रतिपक्ष के खिलाफ? इस पर सदन में ‘अमित शाह माफी मांगो’ के नारे गूंजने लगे। हंगामे के बीच शाह ने दो-टूक कहा कि सदस्यों को अब उनकी बात सुननी ही होगी। आसन पर बैठे जगदंबिका पाल ने स्पष्ट किया कि यदि कोई शब्द असंसदीय होगा, तो उसे कार्यवाही से हटा दिया जाएगा।
“सदन मेला नहीं है, नियमों से चलेगा”
विपक्ष को नसीहत देते हुए गृह मंत्री ने कहा कि संविधान ने सदस्यों को अधिकार दिए हैं, लेकिन ‘विशेषाधिकार’ (कि कुछ भी करेंगे) नहीं। उन्होंने कहा, “यह सदन कोई मेला नहीं है, यह नियमों से चलता है। जो नियम के अनुसार नहीं बोलेगा, उसका माइक बंद ही होना चाहिए।” शाह ने आगे कहा कि स्पीकर सदन के कस्टोडियन हैं और उनकी निष्ठा पर सवाल उठाना लोकतंत्र के लिए निंदनीय है।
अविश्वास प्रस्ताव के इतिहास पर वार
अमित शाह ने याद दिलाया कि संसद के इतिहास में जब भी स्पीकर के खिलाफ प्रस्ताव आए, बीजेपी ने कभी उनका समर्थन नहीं किया। उन्होंने कटाक्ष किया कि जो तीन दल आज साथ मिलकर अविश्वास प्रस्ताव लाए हैं, उनके द्वारा लाए गए पिछले तीनों प्रस्ताव इतिहास में ध्वनि मत से खारिज हो चुके हैं। शाह ने प्रस्ताव में तारीखों और दस्तावेजों की गलतियों का जिक्र करते हुए विपक्ष की ‘गंभीरता’ पर भी सवाल उठाए।

