आगरा में खौफनाक प्रदर्शन: पानी के लिए टंकी पर चढ़े ग्रामीण, ऊपर लटकी बीडीसी महिला सदस्य; मची चीख-पुकार

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कागारौल (आगरा)। उत्तर प्रदेश के आगरा जिला अंतर्गत खेरागढ़ ब्लॉक के गढ़मुक्खा गांव (ग्राम पंचायत बेरी चाहर) में रविवार को पानी की भीषण किल्लत और सूखे तालाब को लेकर ग्रामीणों का धैर्य जवाब दे गया। झुलसा देने वाली 42°C की जानलेवा गर्मी के बीच पानी की बूंद-बूंद को तरसते आक्रोशित ग्रामीणों और महिलाओं का गुस्सा फूट पड़ा और वे गांव की ऊंची पानी की टंकी पर चढ़कर प्रशासन के खिलाफ उग्र नारेबाजी करने लगे। इस हाई-वोल्टेज प्रदर्शन के दौरान तब हड़कंप मच गया, जब ग्रामीणों का नेतृत्व कर रही एक महिला क्षेत्र पंचायत सदस्य (बीडीसी) ने टंकी से सीधे नीचे छलांग लगा दी।

​टंकी से नीचे कूदीं बीडीसी अनीता सिंह, पुलिस और ग्रामीणों ने हवा में खींचा

प्रशासनिक उपेक्षा और अधिकारियों के झूठे आश्वासनों से क्षुब्ध क्षेत्र पंचायत सदस्य (BDC) अनीता सिंह इस कदर आक्रोशित थीं कि उन्होंने अपनी जान की परवाह न करते हुए टंकी के ऊपरी हिस्से से नीचे छलांग लगा दी। कूदने के प्रयास में वह टंकी की रैलिंग और दीवार के सहारे हवा में लटक गईं। महिला जनप्रतिनिधि को इस तरह मौत के मुंह में लटकता देख नीचे खड़े ग्रामीणों और पुलिसकर्मियों के होश उड़ गए और पूरे परिसर में चीख-पुकार मच गई।

​टंकी पर पहले से मौजूद कुछ सजग ग्रामीणों और नीचे तैनात मुस्तैद पुलिसकर्मियों ने अपनी जान दांव पर लगाकर तत्परता दिखाई और किसी तरह अनीता सिंह को सुरक्षित ऊपर की ओर खींच लिया। इस जांबाजी से एक बहुत बड़ा और दर्दनाक हादसा होने से बाल-बाल बच गया।

16 साल से खारे पानी का दंश; लाखों की सरकारी टंकी बनी ‘शोपीस’

​प्रदर्शनकारियों ने जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक दावों की पोल खोलते हुए बताया कि गढ़मुक्खा गांव के लोग साल 2010 से यानी पिछले 16 वर्षों से खारे पानी की समस्या से जूझ रहे हैं। ग्रामीणों की पुरजोर मांग पर वर्ष 2019 में वर्तमान सांसद राजकुमार चाहर और तत्कालीन विधायक महेश गोयल के प्रयासों से लाखों रुपये की भारी-भरकम लागत से एक नई पानी की टंकी का निर्माण तो कराया गया था, लेकिन यह सरकारी प्रोजेक्ट आज पूरी तरह सफेद हाथी साबित हो रहा है। लाखों का बजट डकारने के बाद भी यह टंकी आज सिर्फ एक ‘शोपीस’ बनकर खड़ी है और ग्रामीणों के कंठ सूखे हैं।

42 डिग्री पारे में तड़प-तड़प कर दम तोड़ रहे बेजुबान पशु

ग्रामीणों का दर्द उस समय आंसुओं के रूप में छलक पड़ा जब उन्होंने बताया कि गांव का ऐतिहासिक और मुख्य तालाब महीनों से पूरी तरह सूखा पड़ा है। 42 डिग्री के झुलसा देने वाले तापमान के बावजूद मूक पशुओं के लिए पीने के पानी की कोई व्यवस्था नहीं है। पानी न मिलने के कारण आए दिन बेजुबान मवेशी, पक्षी और गाएं तड़प-तड़प कर दम तोड़ रही हैं। इंसानों के साथ-साथ इन बेजुबान जीव-जंतुओं की इस बदहाली से गुस्साए ग्रामीण अपनी जान हथेली पर रखकर टंकी पर चढ़ने को मजबूर हुए।

​भारी पुलिस बल और आला अधिकारियों का जमावड़ा, मिला आश्वासन

​टंकी से छलांग लगाने की इस हाई-वोल्टेज सूचना से प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया। आनन-फानन में थाना प्रभारी कागारौल अंकुर राठी और मलपुरा थाना पुलिस भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। इसके कुछ ही देर बाद एसीपी सुकन्या कुमारी, नायब तहसीलदार अभिषेक कुमार और एडीओ पंचायत दीवान सिंह भी दलबल के साथ घटना स्थल पर आ धमके।

​पूर्व प्रधान सतीश कुमार और शैलेंद्र चाहर (लालू चेयरमैन) की मध्यस्थता में अधिकारियों ने प्रदर्शनकारी ग्रामीणों को पानी की समस्या के त्वरित समाधान का ठोस आश्वासन देकर काफी समझाया-बुझाया, जिसके बाद आक्रोशित महिलाएं और पुरुष टंकी से नीचे उतरे।

​ये ग्रामीण अंत तक डटे रहे आंदोलन के मोर्चे पर

​इस बड़े जनांदोलन में मुख्य रूप से संजय सिंह, वीरेंद्र सिंह, रूप सिंह, संतो देवी, सुरेश चन्द्र, कंचन सिंह, नेहरू, देवी सिंह, पप्पी (राजू), बंगा सिंह, सतीश, सुखवीर सिंह, सत्तू, धर्मेन्द्र, भवानी सिंह, अजय सिंह, पन्नालाल, अशोक, शालू, कान्ती और मुन्ना उर्फ सत्येंद्र सिंह सक्रिय रहे। वहीं महिलाओं की टोली में सत्यवती देवी, राजकुमारी, राजवती, कैला देवी, मिथलेश, शीला देवी, मुन्नी देवी, कुन्ता देवी, पार्वती, मिथलेश (सिल्लो देवी), बॉबी, सुनीता और भूदेवी आदि अंत तक डटी रहीं। इनके अलावा दिलीप सिंह, संजू मनचंदा, धीरज चाहर, रूपेश पराशर, रवि ठाकुर, महेश सिंह और रोहित चाहर सहित सैकड़ों ग्रामीणों ने अपनी आवाज बुलंद की।

प्रशासन का आधिकारिक वक्तव्य: “पानी की समस्या और सूखे तालाब को लेकर ग्रामीणों ने प्रदर्शन किया था। मौके पर राजस्व विभाग की टीम को निर्देशित कर दिया गया है। टीम जल्द ही जमीन की नाप (पैमाइश) कर जगह चिह्नित करेगी। तालाब के लिए पानी का रास्ता साफ करने हेतु विशेष रूप से नाली निकलवाई जाएगी, जिससे तालाब में पानी पहुंच सके। इससे ग्रामीणों के साथ-साथ जीव-जंतुओं और पशु-पक्षियों के लिए भी पानी की समस्या का स्थायी समाधान होगा।”
— सुकन्या कुमारी (एसीपी) व अभिषेक कुमार (नायब तहसीलदार)