मुंबई (अनिल बेदाग): जब दुनिया के अलग-अलग कोनों से हजारों स्वर एक साथ भगवद गीता के श्लोकों का उच्चारण करने लगे, तो वह क्षण वैश्विक आध्यात्मिक एकता का प्रतीक बन गया। चिन्मय मिशन ने अपने 75वें स्थापना वर्ष के गौरवशाली अवसर पर ‘चिन्मय गीता समर्पणम्’ के माध्यम से विश्व को एक सूत्र में पिरो दिया। इस विशेष कार्यक्रम में भगवद गीता के 15वें अध्याय ‘पुरुषोत्तम योग’ का भव्य सामूहिक पाठ किया गया।
35 हजार प्रतिभागियों का डिजिटल महासंगम
9 मई 2026 को आयोजित इस अनूठी पहल में 70 से अधिक देशों के 35,000 से ज्यादा लोगों ने ऑनलाइन हिस्सा लिया। तकनीकी रूप से इस विशाल आयोजन को सफल बनाने के लिए दुनिया भर से करीब 1,000 प्रशिक्षित वॉलंटियर्स ने कमान संभाली। ‘सिस्को वेबेक्स’ के माध्यम से हुए इस पाठ को अब ‘एक साथ सबसे अधिक लोगों द्वारा ऑनलाइन पाठ’ की श्रेणी में गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स के लिए नामांकित किया गया है।
विश्व कल्याण की शक्तिशाली प्रार्थना
चिन्मय मिशन के वैश्विक प्रमुख पूज्य स्वामी स्वरूपानंद ने इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा, “चिन्मय गीता समर्पणम् केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि पूरी मानवता को गीता के शाश्वत ज्ञान से जोड़ने का एक आध्यात्मिक सेतु है। जब हजारों लोग एक साथ मंत्रोच्चार करते हैं, तो वह विश्व कल्याण की एक शक्तिशाली प्रार्थना बन जाती है।”
75 वर्षों की यात्रा का स्वर्णिम अध्याय
स्वामी जी ने आगे कहा कि दुनिया भर से मिली इस अभूतपूर्व भागीदारी ने चिन्मय मिशन की 75 वर्षों की यात्रा को अविस्मरणीय बना दिया है। इस कार्यक्रम ने सिद्ध कर दिया कि प्राचीन भारतीय ज्ञान आज भी आधुनिक डिजिटल युग में विश्व को शांति और एकता का मार्ग दिखा सकता है।

