आगरा में डीसीपी सिटी कार्यालय के बाहर युवक का हाईवोल्टेज ड्रामा, आगरा कलेक्ट्रेट में निर्वस्त्र होकर काटा भारी हंगामा

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आगरा: ताजनगरी के सबसे सुरक्षित माने जाने वाले कलेक्ट्रेट परिसर में उस वक्त सनसनी फैल गई, जब डीसीपी सिटी कार्यालय के बाहर एक युवक ने विरोध का बेहद चौंकाने वाला रास्ता चुना। शाहगंज क्षेत्र के रहने वाले इस युवक ने पुलिस द्वारा अपनी शिकायत पर कार्रवाई न किए जाने से क्षुब्ध होकर सबके सामने अपने कपड़े उतार दिए और निर्वस्त्र होकर हंगामा करने लगा। इस अप्रत्याशित घटना से कार्यालय परिसर में मौजूद अधिकारियों, महिला कर्मचारियों और फरियादियों के बीच अफरा-तफरी मच गई।

इंसाफ की गुहार और अचानक ‘न्यूड’ प्रोटेस्ट

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, युवक काफी समय से डीसीपी कार्यालय के चक्कर काट रहा था। उसका आरोप था कि शाहगंज पुलिस उसकी जायज शिकायत पर कोई ध्यान नहीं दे रही है और उसे लगातार टाला जा रहा है। सिस्टम की कथित संवेदनहीनता से आहत होकर युवक का धैर्य जवाब दे गया। उसने अचानक चिल्लाते हुए विरोध जताना शुरू किया और देखते ही देखते खुद को पूरी तरह निर्वस्त्र कर लिया। इस मंजर को देख वहां मौजूद महिलाओं में दहशत और असहजता फैल गई।

पुलिस की सक्रियता और परिजनों का आक्रोश

​हंगामा बढ़ता देख मौके पर तैनात पुलिसकर्मी तुरंत हरकत में आए। काफी मशक्कत और मान-मनौव्वल के बाद युवक को काबू में किया गया और उसे कपड़े पहनाकर हिरासत में लिया गया। इस बीच युवक के परिजनों ने पुलिस प्रशासन पर गंभीर आरोप जड़े हैं। परिजनों का कहना है कि अगर पुलिस समय रहते सुनवाई कर लेती, तो एक सम्मानित नागरिक को इस तरह सरेआम अपनी मर्यादा दांव पर लगाने को मजबूर नहीं होना पड़ता। उन्होंने इसे पुलिस की लापरवाही की पराकाष्ठा बताया है।

​मानसिक स्थिति या सिस्टम से उपजी कुंठा?

​दूसरी ओर, पुलिस इस पूरे मामले को अलग नजरिए से देख रही है। पुलिस अधिकारियों का प्रारंभिक तर्क है कि युवक मानसिक रूप से अस्वस्थ हो सकता है। पुलिस का कहना है कि सामान्य व्यक्ति विरोध के लिए ऐसा रास्ता नहीं चुनता। फिलहाल पुलिस युवक की मेडिकल जांच कराने की तैयारी में है ताकि उसकी मानसिक स्थिति का सटीक आकलन किया जा सके। अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि यदि वह बीमार पाया जाता है, तो उसे उचित चिकित्सा सहायता दिलाई जाएगी।

​सुरक्षा और सुनवाई पर उठे बड़े सवाल

​इस घटना ने कलेक्ट्रेट जैसे अति-संवेदनशील इलाके की सुरक्षा व्यवस्था और पुलिस की ‘जनसुनवाई’ प्रणाली पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल यह है कि आखिर एक फरियादी इतना मजबूर क्यों हो गया कि उसे इस शर्मनाक स्थिति का सहारा लेना पड़ा? पुलिस अब इस बात की भी गहराई से जांच कर रही है कि युवक की मूल शिकायत क्या थी और संबंधित थाने स्तर पर उस पर क्या कार्रवाई की गई थी।