लखनऊ के सियासी गलियारों से एक बड़ी खबर निकलकर सामने आ रही है, जिसने उत्तर प्रदेश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। योगी सरकार अब राज्य के मदरसों में भी ‘वंदे मातरम’ का गायन अनिवार्य करने की दिशा में विचार कर रही है। यह संकेत प्रदेश के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने एक हालिया मीडिया साक्षात्कार के दौरान दिए हैं।
इस कदम का आधार पश्चिम बंगाल का वह मॉडल है, जहाँ शुभेंदु अधिकारी की पहल पर मदरसों में राष्ट्रगान और वंदे मातरम को अनिवार्य कर दिया गया था। अब इसी तर्ज पर उत्तर प्रदेश सरकार भी अपने अल्पसंख्यकों के लिए विशेष नीति तैयार करने की तैयारी में दिख रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि 2027 के आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव नजदीक हैं, जिसके चलते तमाम राजनीतिक दल अपने-अपने समीकरण साधने में लगे हैं। इस कड़ी में एनडीए गठबंधन के सहयोगी और सुभासपा अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर के इस बयान को सीधे तौर पर चुनावी राजनीति और वोट बैंक की लामबंदी से जोड़कर देखा जा रहा है।
क्या बोले मंत्री ओम प्रकाश राजभर?
पश्चिम बंगाल के उदाहरण पर जब मंत्री ओपी राजभर से सवाल किया गया कि क्या उत्तर प्रदेश में भी मदरसों में वंदे मातरम को अनिवार्य किया जाएगा, तो उन्होंने पूरी बेबाकी के साथ इस संभावना को स्वीकार किया। राजभर ने स्पष्ट लहजे में कहा कि अल्पसंख्यक कल्याण विभाग उनके अधिकार क्षेत्र में है, इसलिए वे राज्य के मदरसों में भी ऐसी व्यवस्था लागू करने के पक्ष में हैं। उन्होंने सवालिया लहजे में कहा कि ऐसी व्यवस्था लागू करने में आखिर हर्ज ही क्या है?
राजभर ने अपने इस कदम को ‘सुधारवादी’ दृष्टिकोण बताते हुए कहा कि उनकी मंशा मदरसा जाने वाले छात्रों को आधुनिक शिक्षा, बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं, रोजगार के अवसर और समाज में अमन-चैन व भाईचारा प्रदान करने की है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस सकारात्मक पहल का उद्देश्य बच्चों को मुख्यधारा से जोड़ना है।
अखिलेश और राहुल पर साधा निशाना
अपने बयान के साथ ही राजभर ने विपक्षी नेताओं, विशेषकर अखिलेश यादव और राहुल गांधी पर तीखे हमले किए। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी दल समाज में नफरत फैलाकर अपनी राजनीतिक रोटियां सेंक रहे हैं।
राजभर ने सपा प्रमुख अखिलेश यादव पर तंज कसते हुए कहा कि वे और राहुल गांधी मुसलमानों को केवल अपना ‘वोट बैंक’ समझते हैं और नहीं चाहते कि वे शिक्षित होकर अपने भविष्य का सही चुनाव कर सकें। उन्होंने तंजिया लहजे में ‘खाता न बही, जौन अखिलेश कहें, वही सही’ मुहावरे का जिक्र कर सपा के कामकाज पर सवाल खड़े किए।
विवाद का नया केंद्र बना ‘वंदे मातरम’
पश्चिम बंगाल में वंदे मातरम की अनिवार्यता के बाद से ही मुस्लिम संगठनों के भीतर विरोध के स्वर उठने लगे थे, और अब उत्तर प्रदेश में भी इस मुद्दे ने जोर पकड़ लिया है। विपक्षी दलों ने योगी सरकार के इस संभावित प्रस्ताव का विरोध करने का मन बना लिया है। आने वाले समय में यह मुद्दा प्रदेश की राजनीति में कितना गहरा प्रभाव डालेगा, यह तो वक्त बताएगा, लेकिन इतना तय है कि मदरसों में वंदे मातरम की चर्चा ने यूपी की सियासत में हलचल तेज कर दी है।


