आगरा: वाइल्डलाइफ एसओएस को वन्यजीव संरक्षण, एंटी-पोचिंग पहलों तथा भारत के बाघों के सुरक्षित भविष्य को सुनिश्चित करने में उत्कृष्ट योगदान के लिए 5वें रॉयल रणथंभौर इंटरनेशनल टाइगर वीक 2026 में सम्मानित किया गया।
रणथंभौर में आयोजित 5वें रॉयल रणथंभौर इंटरनेशनल टाइगर वीक 2026 के दौरान वाइल्डलाइफ एसओएस को प्रतिष्ठित ‘टाइगर प्रोटेक्शन एंड एंटी-पोचिंग एक्सीलेंस अवॉर्ड’ से सम्मानित किया गया। यह सम्मान संगठन को वन्यजीव संरक्षण, एंटी-पोचिंग पहलों तथा भारत के बाघों के सुरक्षित भविष्य को सुनिश्चित करने की दिशा में उसके उत्कृष्ट योगदान के लिए प्रदान किया गया। वाइल्डलाइफ एसओएस के सह-संस्थापक और सीईओ, कार्तिक सत्यनारायण ने संगठन की ओर से यह सम्मान ग्रहण किया तथा वाइल्डलाइफ एसओएस के एंटी-पोचिंग प्रयासों पर एक प्रस्तुति दी।
5वें रॉयल रणथंभौर इंटरनेशनल टाइगर वीक 2026 में देश-विदेश के प्रमुख संरक्षणविदों, नीति-निर्माताओं, वन अधिकारियों, शोधकर्ताओं, फोटोग्राफरों, पर्यटन क्षेत्र से जुड़े हितधारकों तथा वन्यजीव प्रेमियों ने भाग लिया। इस आयोजन का उद्देश्य भारत की बाघ संरक्षण में उपलब्धियों का उत्सव मनाने के साथ-साथ अब भी विद्यमान चुनौतियों पर विचार-विमर्श करना था।
कार्यक्रम का उद्घाटन दिल्ली उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश, न्यायमूर्ति श्री धर्मेश शर्मा ने किया। इंटरनेशनल टाइगर वीक कंज़र्वेशन अवॉर्ड्स 2026 के अंतर्गत वन्यजीव संरक्षण, एंटी-पोचिंग प्रयासों, संरक्षण नेतृत्व, पत्रकारिता, फोटोग्राफी तथा संरक्षण के क्षेत्र में आजीवन योगदान सहित विभिन्न श्रेणियों में उत्कृष्ट कार्यों को सम्मानित किया गया।
पिछले तीन दशकों से अधिक समय से वाइल्डलाइफ एसओएस अवैध वन्यजीव व्यापार पर अंकुश लगाने तथा बाघ सहित भारत के संकटग्रस्त वन्यजीवों के संरक्षण के लिए कार्य कर रहा है। संगठन की एंटी-पोचिंग इकाई फॉरेस्ट वॉच वन विभाग, पुलिस विभाग तथा अन्य कानून प्रवर्तन एजेंसियों को वन्यजीव तस्करों तथा अवैध वन्यजीव व्यापार से जुड़े अपराधियों के विरुद्ध कार्रवाई करने, उनके कब्जे से वन्यजीवों की खाल, शरीर के अंग, हाथीदांत तथा और कई मामलों में जीवित वन्यजीवों को भी सुरक्षित बरामद करने और आवश्यकता पड़ने पर कानूनी सहायता उपलब्ध कराने में सहयोग करती है। हमारे प्रयासों से प्रवर्तन एजेंसियों को संगठित शिकार गिरोहों का पर्दाफाश करने, घातक जॉ ट्रैप, फंदों तथा अन्य शिकार उपकरणों को बरामद करने और संरक्षित क्षेत्रों में फंदों की तलाश के अभियान संचालित करने में सहायता मिली है।
साथ ही, इन प्रयासों ने वन्यजीव अपराधियों के सफल अभियोजन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जिसमें लगभग दो वर्ष तक चली कानूनी प्रक्रिया के बाद तमिलनाडु में बाघ के शिकार में संलिप्त एक गिरोह को दोषसिद्ध किए जाने जैसा ऐतिहासिक मामला भी शामिल है। भारत के सबसे प्रतिष्ठित बाघ संरक्षण मंचों में से एक पर प्राप्त यह सम्मान बाघों और उनके प्राकृतिक आवास के दीर्घकालिक संरक्षण के प्रति संगठन की प्रतिबद्धता को पुनः स्थापित करता है।
वाइल्डलाइफ एसओएस के सह-संस्थापक और सीईओ, कार्तिक सत्यनारायण ने कहा, “यह सम्मान हमारी पूरी टीम, वन विभाग में हमारे सहयोगियों तथा उन समुदायों के सामूहिक प्रयासों की पहचान है, जो भारत के बाघों की रक्षा में हमारे साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं। एंटी-पोचिंग कार्य अक्सर लोगों की नज़रों से दूर रहता है। यह दूरस्थ क्षेत्रों में, अंधेरे में और उन लोगों के सहयोग से किया जाता है, जो वन्यजीवों की रक्षा के लिए अपने प्राणों तक का जोखिम उठाते हैं। हम यह सम्मान उन सभी की ओर से स्वीकार करते हैं।”
दिल्ली उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश, न्यायमूर्ति श्री धर्मेश शर्मा ने कहा, “कार्तिक सत्यनारायण द्वारा एंटी-पोचिंग प्रयासों और बाघ संरक्षण पर दिया गया व्याख्यान अत्यंत ज्ञानवर्धक था। इस सत्र ने वन्यजीव अपराधों से जुड़ी जटिल चुनौतियों तथा जन-जागरूकता और संरक्षण संबंधी प्रयासों को और अधिक सशक्त बनाने की तत्काल आवश्यकता को रेखांकित किया। इस प्रकार की पहलें वन्यजीव संरक्षण के प्रति व्यापक समझ विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
न्यायपालिका भी वन्यजीव अपराधों में संलिप्त अपराधियों के विरुद्ध सशक्त और समयबद्ध कानूनी कार्रवाई तथा सफल अभियोजन को समर्थन देकर निवारक प्रभाव उत्पन्न करने में योगदान दे सकती है। मैं वाइल्डलाइफ एसओएस और इंटरनेशनल टाइगर वीक के सराहनीय कार्यों की प्रशंसा करता हूँ तथा उनके संरक्षण प्रयासों की निरंतर सफलता की कामना करता हूँ।”
वाइल्डलाइफ एसओएस के सह-संस्थापक और सीईओ, कार्तिक सत्यनारायण ने आगे कहा, “भारत ने संसार चंद और भीमा बावरिया जैसे कुख्यात अपराधियों के नेतृत्व में संचालित संगठित शिकार गिरोहों के कारण बाघों, तेंदुओं, ऊदबिलावों तथा अन्य वन्यजीवों की बड़ी संख्या खोई है। इन अपराधियों का संबंध सरिस्का और पन्ना टाइगर रिज़र्व से बाघों और तेंदुओं के गायब होने सहित कई बड़े वन्यजीव अपराधों से रहा है।
वाइल्डलाइफ एसओएस की एंटी-पोचिंग इकाई ने समन्वित प्रवर्तन अभियानों के लिए महत्वपूर्ण खुफिया जानकारी उपलब्ध कराई है। इनमें केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई), वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो (डब्ल्यूसीसीबी), हरियाणा पुलिस और हरियाणा वन विभाग के साथ संयुक्त रूप से की गई छापेमारी भी शामिल है, जिसके दौरान गुरुग्राम (दिल्ली एनसीआर) में भीमा बावरिया को बाघ के कंकाल, बाघ की खाल, दो कछुओं तथा अन्य अवैध वन्यजीव सामग्री के साथ गिरफ्तार किया गया था।
अनेक राज्यों में दोषसिद्ध होने के बावजूद भीमा को लगातार जमानत मिलती रही है और वह आज भी बाघों के अवैध शिकार तथा उनके शरीर के अंगों की तस्करी में संलिप्त है। यह स्थिति खुफिया जानकारी आधारित सतत प्रवर्तन, गैर-सरकारी संगठनों और प्रवर्तन एजेंसियों के बीच मजबूत समन्वय, अभियोजन की निरंतर प्रक्रिया तथा जनसामान्य की अधिक सतर्कता की आवश्यकता को रेखांकित करती है। भारत के बाघों की सुरक्षा सामूहिक प्रयासों से ही संभव है और वाइल्डलाइफ एसओएस इस उद्देश्य के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है।”
वाइल्डलाइफ एसओएस की सह-संस्थापक और सचिव, गीता शेषमणि ने कहा, “भारत में बाघों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, लेकिन यह उपलब्धि अभी भी नाज़ुक है और इसे हल्के में नहीं लिया जा सकता। अवैध शिकार आज भी बाघों के अस्तित्व के लिए सबसे गंभीर खतरों में से एक है और उनके दीर्घकालिक अस्तित्व को सुनिश्चित करने के लिए अटूट प्रतिबद्धता आवश्यक है। इस सम्मान से हम अत्यंत गौरवान्वित हैं और भारत के बाघों के सुरक्षित भविष्य को सुनिश्चित करने के लिए अपनी पूरी क्षमता के साथ कार्य करते रहने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”
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ऋषभ मेहता – 9560011875 / 9258129583
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वाइल्डलाइफ एसओएस (www.wildlifesos.org) एक गैर-लाभकारी संरक्षण संगठन है, जिसकी स्थापना वर्ष 1995 में हुई थी। यह संगठन पूरे भारत में संकटग्रस्त वन्यजीवों के बचाव और पुनर्वास के लिए कार्य करता है। अवैध वन्यजीव व्यापार पर रोक लगाने और मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के साथ-साथ, यह संगठन वन्यजीवों के आवासों की रक्षा और सतत आजीविका को बढ़ावा देने के लिए सरकारी एजेंसियों और स्थानीय समुदायों के साथ सक्रिय रूप से सहयोग करता है।
वाइल्डलाइफ एसओएस अपने ‘भिक्षावृत्ति में उपयोग किए जाने वाले हाथियों के विरुद्ध अभियान’ (Begging Elephant Campaign) के माध्यम से कैद में रखे गए हाथियों के शोषण को समाप्त करने के राष्ट्रीय अभियान का भी नेतृत्व कर रहा है। इस अभियान के तहत शहरी सड़कों, शादी समारोहों तथा मंदिरों में भीख मंगवाने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले प्रताड़ित हाथियों का बचाव कर उन्हें दीर्घकालिक चिकित्सीय देखभाल और सुरक्षित आश्रय उपलब्ध कराया जाता है। इसके अतिरिक्त, संगठन रिस्पॉन्सिबल टूरिज्म सोसाइटी ऑफ इंडिया जैसे संस्थानों के साथ ‘रिफ्यूज़ टू राइड’ अभियान के अंतर्गत साझेदारी कर पर्यटन में उपयोग किए जाने वाले कैद हाथियों की दुर्दशा के प्रति जन-जागरूकता भी बढ़ाता है।


