मिशन शक्ति को ठेंगा! ऑटो में बजते द्विअर्थी गाने और बिना वेरिफिकेशन दौड़ते चालक; आगरा पुलिस के ‘QR कोड’ अभियान का क्या हुआ?

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आगरा: ताजनगरी में महिलाओं और स्कूल-कॉलेज जाने वाली छात्राओं के लिए ऑटो का सफर अब सुरक्षित नहीं रह गया है। शहर की सड़कों पर दौड़ते ऑटो रिक्शा में बजते तेज आवाज में अश्लील और द्विअर्थी गाने न केवल सभ्य समाज को शर्मसार कर रहे हैं, बल्कि महिला गरिमा के लिए गंभीर खतरा बन गए हैं। इस ज्वलंत मुद्दे को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता और कोशिश फाउंडेशन के अध्यक्ष नरेश पारस ने मोर्चा खोलते हुए जिलाधिकारी, पुलिस कमिश्नर और महिला आयोग को पत्र लिखकर सख्त कार्रवाई की मांग की है।

दहशत का सफर: ऑटो से कूदने को मजबूर छात्राएं

​हाल ही में एकता थाना क्षेत्र में हुई एक रोंगटे खड़े कर देने वाली घटना ने सुरक्षा व्यवस्था की कलई खोल दी है। परीक्षा देकर लौट रही कक्षा छह की एक छात्रा को ऑटो चालक की छेड़छाड़ से बचने के लिए चलते ऑटो से कूदना पड़ा। हालांकि आरोपी को पॉक्सो एक्ट के तहत जेल भेज दिया गया है, लेकिन सवाल यह है कि ऐसी नौबत ही क्यों आई? क्या पुलिस का खौफ खत्म हो चुका है?

​ठंडे बस्ते में ‘हाईटेक’ सुरक्षा अभियान

​कुछ समय पहले आगरा पुलिस ने बड़े तामझाम के साथ ऑटो चालकों के सत्यापन और QR कोड प्रणाली की शुरुआत की थी। योजना थी कि ​हर ऑटो पर चालक का पूरा विवरण और हेल्पलाइन नंबर दर्ज होगा। क्यूआर कोड स्कैन करते ही पुलिस कंट्रोल रूम को जानकारी मिल जाएगी। ​बिना वेरिफिकेशन के कोई भी चालक ऑटो नहीं चला पाएगा।

लेकिन हकीकत ये है कि आज यह अभियान फाइलों में दबा नजर आ रहा है। न तो ऑटो पर क्यूआर कोड दिख रहे हैं और न ही चालकों का कोई डेटाबेस अपडेट है।

नरेश पारस की 6 सूत्रीय मांगें: अब आर-पार की लड़ाई

​प्रशासन को लिखे पत्र में नरेश पारस ने छह प्रमुख बिंदुओं पर तत्काल कार्रवाई की मांग की है:

अश्लील गानों पर बैन: ऑटो में द्विअर्थी और अभद्र गीत बजाने पर भारी जुर्माना और परमिट निरस्त हो।

अनिवार्य QR कोड: हर ऑटो के अंदर और बाहर क्यूआर कोड चस्पा किया जाए।

​पुलिस सत्यापन: शत-प्रतिशत ऑटो चालकों का चरित्र सत्यापन (Verification) अनिवार्य हो।

हेल्पलाइन डिस्प्ले: विमेन पावर लाइन 1090 और यूपी 112 के नंबर बड़े अक्षरों में लिखे जाएं।

ऑनलाइन डेटा: चालक और मालिक का विवरण पोर्टल पर सार्वजनिक हो।

कठोर दंड: नियमों का उल्लंघन करने वालों पर गैर-जमानती धाराओं में कार्रवाई हो।

प्रशासनिक चुप्पी पर सवाल

​शहर की जागरूक जनता पूछ रही है कि जब ‘मिशन शक्ति’ जैसे अभियान पूरे प्रदेश में चल रहे हैं, तो आगरा के ऑटो में यह अराजकता क्यों है? क्या प्रशासन किसी और बड़ी अनहोनी का इंतजार कर रहा है? छात्राओं का कहना है कि ऑटो में बजने वाले अश्लील गाने उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित करते हैं और असामाजिक तत्वों को बढ़ावा देते हैं।