कोलकाता/लेह। देश के दो महत्वपूर्ण हिस्सों पश्चिम बंगाल और केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख से गुरुवार को बड़ी राजनीतिक खबरें सामने आईं। जहाँ एक ओर पश्चिम बंगाल के राज्यपाल डॉ. सीवी आनंद बोस ने अचानक अपने पद से इस्तीफा देकर सबको चौंका दिया, वहीं दूसरी ओर लद्दाख के उप-राज्यपाल कविंदर गुप्ता ने भी मात्र 9 महीने के कार्यकाल के बाद पद छोड़ दिया है। इन दोनों फैसलों ने देश के राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है।
बंगाल: ममता बनर्जी ने केंद्र पर लगाया ‘दबाव’ का आरोप
पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनावों से ठीक पहले राज्यपाल सीवी आनंद बोस का इस्तीफा चर्चा का विषय बना हुआ है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने ‘X’ पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए गहरा दुख और चिंता व्यक्त की। उन्होंने आशंका जताई कि चुनावों के मद्देनजर केंद्रीय गृह मंत्री द्वारा राज्यपाल पर किसी राजनीतिक हित की पूर्ति के लिए दबाव डाला गया होगा।
ममता बनर्जी ने तमिलनाडु के राज्यपाल आर.एन. रवि को बंगाल का अतिरिक्त प्रभार सौंपे जाने पर भी कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि स्थापित परंपराओं के उलट केंद्र ने इस संबंध में उनसे कोई परामर्श नहीं किया, जो कि सहकारी संघवाद और लोकतांत्रिक गरिमा के विरुद्ध है।
लद्दाख: जन-आक्रोश और अशांति के बीच इस्तीफा
लद्दाख के तीसरे उप-राज्यपाल के रूप में 18 जुलाई 2025 को शपथ लेने वाले कविंदर गुप्ता का कार्यकाल विवादों और विरोध प्रदर्शनों से घिरा रहा। राज्य का दर्जा, छठी अनुसूची की सुरक्षा और स्थानीय नौकरियों में आरक्षण जैसी मांगों को लेकर ‘लेह एपेक्स बॉडी’ और ‘कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस’ लगातार विरोध कर रहे थे।
रिपोर्ट्स के अनुसार, बुधवार को एक स्थानीय मठ के दौरे के दौरान उन्हें जनता के भारी गुस्से का सामना करना पड़ा था। इसके अगले ही दिन उन्होंने अपने पद से त्यागपत्र दे दिया। लद्दाख में बढ़ती अशांति और स्थानीय लोगों की नाराजगी को उनके इस्तीफे की मुख्य वजह माना जा रहा है।
क्या होगा अगला कदम?
पश्चिम बंगाल में आर.एन. रवि के प्रभार संभालने के बाद राजभवन और ममता सरकार के बीच टकराव बढ़ने के आसार हैं। वहीं, लद्दाख में केंद्र सरकार अब किसी ऐसे चेहरे की तलाश करेगी जो वहां के सिविल सोसाइटी ग्रुप्स के साथ संवाद स्थापित कर स्थिति को नियंत्रित कर सके।

