बिहार में विक्रमशिला पुल ने ली ‘जल समाधि’; बाल-बाल बचे वाहन सवार, तेजस्वी यादव बोले- भ्रष्ट व्यवस्था का बचाव कर रही सरकार

Politics

पटना/भागलपुर: बिहार में पुल गिरने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। सोमवार को भागलपुर का महत्वपूर्ण विक्रमशिला सेतु एक बार फिर भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया। पुल का एक हिस्सा (स्लैब) अचानक गंगा नदी में समा गया। राहत की बात यह रही कि जिस वक्त यह हादसा हुआ, उस समय स्लैब पर कोई वाहन मौजूद नहीं था, जिससे बड़ी जनहानि टल गई। इस घटना को लेकर नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने वीडियो जारी कर राज्य सरकार के खिलाफ तीखा हमला बोला है।

​तेजस्वी का वार: “भ्रष्टाचार का प्रत्यक्ष प्रमाण”

तेजस्वी यादव ने सोशल मीडिया पर वीडियो पोस्ट करते हुए लिखा कि बिहार की एनडीए सरकार ने पिछले 21 वर्षों में पुल गिरने का ‘वर्ल्ड रिकॉर्ड’ बना दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार को पिछले महीने ही इस पुल की जर्जर हालत के बारे में आगाह किया गया था, लेकिन भ्रष्ट व्यवस्था ने इसे नजरअंदाज कर दिया। तेजस्वी ने दावा किया कि बीते दो सालों में बिहार में 100 से अधिक छोटे-बड़े पुल गिर चुके हैं, जो राज्य के विकास दावों की पोल खोलते हैं।

​बाल-बाल बचे यात्री

घटनास्थल से मिली जानकारी के अनुसार, जब पुल का स्लैब गिरा, तब पुल पर कई वाहन गुजर रहे थे। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि अगर कुछ सेकंड की भी देरी होती तो कई गाड़ियां सीधे गंगा में समा सकती थीं। तेजस्वी ने इसे ‘ईश्वर का आशीर्वाद’ बताते हुए कहा कि जानमाल का नुकसान तो नहीं हुआ, लेकिन भ्रष्टाचार का सबूत पूरी दुनिया ने देख लिया।

​सपा नेता ने की सुप्रीम कोर्ट और CBI जांच की मांग

इस मामले ने अब राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक तूल पकड़ लिया है। समाजवादी पार्टी के नेता आईपी सिंह ने तेजस्वी के वीडियो को रिपोस्ट करते हुए सुप्रीम कोर्ट से हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने लिखा कि माननीय सुप्रीम कोर्ट के सिटिंग जज की देखरेख में इन हादसों का संज्ञान लिया जाना चाहिए और इसकी जांच CBI व ED से करानी चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि आखिर बिहार और गुजरात जैसे राज्यों में ही सबसे ज्यादा पुल क्यों गिर रहे हैं?

​सरकार पर उठे गंभीर सवाल

विक्रमशिला सेतु भागलपुर की लाइफलाइन माना जाता है। इसके गिरने से यातायात व्यवस्था चरमरा गई है। विपक्ष का कहना है कि यह केवल एक संरचनात्मक विफलता नहीं है, बल्कि बिहार में व्याप्त संगठित भ्रष्टाचार का नतीजा है। अब सबकी नजरें राज्य सरकार की प्रतिक्रिया और भविष्य की जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं।