आगरा। विश्व धरोहर ताजमहल के मुख्य मकबरे के नीचे स्थित ‘चमेली फर्श’ पर धार्मिक गतिविधियों का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने सुरक्षा और स्मारकों के नियमों को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
वायरल हो रहे लगभग 1 मिनट 2 सेकंड के इस वीडियो में 30 से 35 लोगों का एक समूह भगवा वस्त्र धारण किए हुए बैठकर कीर्तन करता और ‘हरे कृष्णा-हरे राम’ का जाप करता दिखाई दे रहा है।
वीडियो में साफ तौर पर देखा जा सकता है कि एक व्यक्ति भगवा वस्त्र में कीर्तन का नेतृत्व कर रहा है, जिसके सामने महिलाएं और युवतियां बैठी हैं। इस दौरान वहां अन्य पर्यटक भी सामान्य रूप से घूमते हुए नजर आ रहे हैं। वीडियो में पृष्ठभूमि से एक गाइड की आवाज भी सुनाई दे रही है, जो पर्यटकों को ताजमहल और यमुना से जुड़ी जानकारी दे रहा है। इससे कयास लगाए जा रहे हैं कि यह घटना उस समय की है जब स्मारक में पर्यटकों की आवाजाही जारी थी।
एएसआई ने की जांच शुरू
मामले की गंभीरता को देखते हुए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने मामले का संज्ञान लिया है। ताजमहल के वरिष्ठ संरक्षण सहायक कलंदर ने जानकारी दी कि वायरल वीडियो को लेकर सुरक्षा बल सीआईएसएफ (CISF) से आधिकारिक रिपोर्ट तलब की गई है।
उन्होंने कहा, “हम इस बात की पुष्टि कर रहे हैं कि यह वीडियो मंगलवार का है या पुराना। रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद ही घटना की सत्यता और सुरक्षा में हुई चूक पर आगामी वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।”
ताजमहल में धार्मिक गतिविधियों को लेकर नियम
ताजमहल एक संरक्षित स्मारक है, जहां भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा धार्मिक गतिविधियों को लेकर अत्यंत सख्त नियम लागू हैं। नियमों के अनुसार, ताजमहल के भीतर किसी भी प्रकार के धार्मिक अनुष्ठान, कीर्तन या पूजा की अनुमति नहीं है। यहाँ केवल शुक्रवार, रमजान और ईद के अवसर पर ही नमाज अदा करने की विशेष छूट दी गई है। इसके अलावा, स्मारक परिसर में किसी भी अन्य धार्मिक गतिविधि का आयोजन करना नियमों का सीधा उल्लंघन माना जाता है।
अब सबकी निगाहें सीआईएसएफ द्वारा सौंपी जाने वाली जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं। यह घटना स्मारक की सुरक्षा में तैनात कर्मियों की सतर्कता पर भी बड़े सवाल खड़े कर रही है, क्योंकि पर्यटकों के भारी जमावड़े के बीच इस प्रकार का आयोजन बिना रोक-टोक के कैसे संभव हुआ, यह जांच का विषय है।


