यूपी के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य का विपक्ष पर तीखा प्रहार: कहा— यूसीसी पर विपक्ष होता है लाल-पीला, राहुल गांधी और अखिलेश यादव स्पष्ट करें अपना रुख

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने समान नागरिक संहिता (UCC) के मुद्दे पर कांग्रेस और समाजवादी पार्टी समेत पूरे विपक्ष पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए कहा कि केवल समान नागरिक संहिता की चर्चा मात्र से ही कांग्रेस और तमाम विरोधी दल लाल-पीले होने लगते हैं। डिप्टी सीएम ने दो टूक शब्दों में कहा कि जब देश के संविधान की नजर में हर नागरिक एक समान है, तो फिर यूसीसी किसी एक राजनीतिक दल का नहीं बल्कि सीधे तौर पर राष्ट्रीय महत्व का विषय है।

​’जो 2014 से पहले थे सपने, मोदी सरकार ने किए साकार’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए केशव प्रसाद मौर्य ने लिखा कि पीएम मोदी अपने भागीरथी प्रयासों से देशहित के तमाम बड़े संकल्पों को एक-एक कर धरातल पर उतार रहे हैं। उन्होंने अयोध्या में भगवान श्रीराम के भव्य मंदिर के निर्माण और जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को समाप्त करने का जिक्र करते हुए कहा कि वर्ष 2014 से पहले ये सभी बातें केवल एक सपने जैसी थीं। इसके अलावा, उन्होंने देश को नक्सल-मुक्त बनाने की दिशा में सरकार की सफलता का उल्लेख करते हुए कहा कि कभी पशुपति से तिरुपति तक ‘लाल गलियारा’ (रेड कॉरिडोर) बनाने का ख्वाब देखने वाले वामपंथियों के मंसूबों पर मोदी सरकार की मजबूत इच्छाशक्ति ने पानी फेर दिया है। आज उसी क्षेत्र में ‘वंदे मातरम्’ के जयकारे गूंज रहे हैं।

​’यूसीसी का उद्देश्य तुष्टिकरण नहीं, सभी का विकास’

समान नागरिक संहिता पर अपनी बात रखते हुए डिप्टी सीएम ने कहा कि इसका मुख्य उद्देश्य किसी भी वर्ग का तुष्टिकरण करना नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति का विकास और सभी को समान रूप से न्याय दिलाना है। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि कथित वोट बैंक की राजनीति करने वाले दलों के अलावा किसी को भी यूसीसी से कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए।

अखिलेश और राहुल गांधी से मांगा जवाब

अपने बयान के अंत में केशव प्रसाद मौर्य ने सपा प्रमुख अखिलेश यादव और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी को आड़े हाथों लेते हुए सीधी चुनौती दी। उन्होंने कहा कि इन नेताओं को जनता के सामने यह स्पष्ट करना चाहिए कि वे समान नागरिक संहिता (UCC) के समर्थन में हैं या फिर हमेशा की तरह पुरानी घिसी-पिटी वोट बैंक की राजनीति की बीमारी से ग्रस्त ही रहना चाहते हैं।