आगरा: हिंदी साहित्य जगत के देदीप्यमान नक्षत्र और अपनी विशिष्ट मौलिक शैली के लिए विख्यात बाबू गुलाब राय की 63वीं पुण्यतिथि पर ताजनगरी के ऐतिहासिक सेंट जोंस कॉलेज में एक भव्य श्रद्धांजलि समारोह का आयोजन किया गया। ‘बाबू गुलाब राय स्मृति संस्थान’ और ‘सेंट जोंस कॉलेज’ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में जुटे साहित्यकारों और मनीषियों ने बाबूजी के बहुआयामी कृतित्व को याद करते हुए उन्हें हिंदी का ‘विचार पुरुष’ बताया।
दार्शनिक सोच और अमूल्य इतिहास
मुख्य अतिथि एवं के.एम. मुंशी संस्थान के पूर्व निदेशक प्रो. हरिमोहन ने बाबूजी की साहित्यिक यात्रा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उनकी प्रारंभिक रचनाएं ‘शांति धर्म’ और ‘मैत्री धर्म’ उनके गहरे दार्शनिक चिंतन का परिचय देती हैं। उन्होंने बताया कि बाबूजी ने ‘हिंदी साहित्य का सुबोध इतिहास’ लिखकर न केवल साहित्य को दस्तावेजी स्वरूप दिया, बल्कि भावी पीढ़ी के लिए एक मार्गदर्शक ग्रंथ भी तैयार किया।
हास्य-व्यंग्य और आत्मकथा की अनूठी शैली
स्मृति संस्थान के अध्यक्ष डॉ. शशि तिवारी ने बाबू गुलाब राय की प्रसिद्ध रचनाओं ‘मेरी असफलताएं’ और ‘ठलुआ क्लब’ का उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी लेखनी में हास्य और व्यंग्य का ऐसा संतुलन था जो पाठकों को सीधे जोड़ लेता था। कॉलेज के प्राचार्य प्रो. एस.पी. सिंह ने अध्यक्षता करते हुए कहा कि बाबूजी का सृजन जीवन के अंतिम क्षणों तक जारी रहा, जो उनके साहित्य के प्रति समर्पण को दर्शाता है।
मेधा का सम्मान: निकिता को छात्रवृत्ति
कार्यक्रम में उस समय उत्साह का संचार हुआ जब एम.ए. हिंदी में सर्वाधिक अंक प्राप्त करने वाली छात्रा कु. निकिता को स्मृति संस्थान की ओर से 11,000 रुपये की सम्मान राशि प्रदान की गई। संस्थान के उपाध्यक्ष आदर्श नंदन गुप्ता ने युवाओं को बाबूजी के आदर्शों को जीवन में उतारने के लिए प्रेरित किया।
विद्वानों का जमावड़ा
समारोह में आरबीएस कॉलेज की पूर्व प्राचार्य डॉ. सुषमा सिंह, वरिष्ठ पत्रकार डॉ. महेश धाकड़ और साहित्यसेवी संजय गुप्त सहित कई वक्ताओं ने अपने विचार रखे। हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. सुनीता शर्मा ने अतिथियों का स्वागत किया। इस दौरान डॉ. जैसमीन, डॉ. दीप्ति और सुमित गुप्ता समेत बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद रहे। कार्यक्रम का कुशल संचालन डॉ. शशिपाल ने किया।

